प्रभाकरन के जीवन की प्रमुख तिथियां
-1972 में स्कूली पढ़ाई अधूरी छोड़कर तमिल विद्रोह में कूदे प्रभाकरन ने तमिल न्यू टाइगर्स का गठन किया।
- 1975 में जाफना के मेयर को मौत के घाट उतारा।
-1976 में उसने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) की बुनियाद रखी।
-1978 में लिट्टे ने अपना पहला प्रेस वक्तव्य जारी किया।
-मई 1982 में मद्रास (अब चेन्नई) में अपने एक प्रतिद्वंद्वी की हत्या की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार हुआ।
-जुलाई 1983 में जाफना में सेना के गश्त लगा रहे दल पर घात लगाकर हमला किया। इसमें 13 सैनिक मारे गए। इसके बाद हिंसक आतंकवाद का दौर शुरू हो गया।
-सितंबर 1983 में भारत आया और चेन्नई में घर का निर्माण करवाया। तमिलनाडु में लिट्टे के लिए प्रशिक्षण कैंप की स्थापना की।
-1984 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. जी. रामचंद्रन से मुलाकात की और जाफना विश्वविद्यालय की छात्रा से शादी की।
-मई 1985 में श्रीलंका के पवित्र शहर अनुराधापुरा में बौद्धों के नरसंहार का आदेश दिया।
-अप्रैल-मई 1986 में प्रतिद्वंद्वी गुट टीईएलओ के विद्रोहियों को मारने का आदेश दिया।
-जनवरी 1987 में भारत छोड़ दिया।
-जुलाई 1987 में भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मिला और कहा कि वह भारत-श्रीलंका संधि को स्वीकार करता है जिसका मतलब तमिल अलगाववाद का खात्मा है।
-अगस्त 1987 में जाफना में भाषण दिया और कहा कि हम भारत से प्यार करते हैं, लेकिन हम उसे सबक सिखाएंगे।
-1989 में श्रीलंकाई राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदास के साथ शांति वार्ता की।
-1989 में लिट्टे ने दो तमिल नेताओं ए. अमिरथालिंगम और वी. योगेस्वरन की कोलंबो में हत्या करवा दी।
-1990 में जाफना पर नियंत्रण स्थापित कर लिया और मीडिया को संबोधित किया।
-जून 1990 में श्रीलंका के खिलाफ लड़ाई शुरू की और जाफना में रह रहे एक लाख मुस्लिमों से जाफना छोड़ने को कहा।
-मार्च 1991 में श्रीलंका के रक्षा मंत्री रंजन विजयरत्ने की कार बम विस्फोट में मौत हुई।
-मई 1991 में लिट्टे ने प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की।
-नवंबर 1992 में श्रीलंका के नौसेना प्रमुख क्लानसे फर्नाडो की हत्या।
-1993 में श्रीलंका के राष्ट्रपति प्रेमदासा की हत्या।
-1994 में राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के साथ वार्ता, लड़ाई रूकी।
-1995 में श्रीलंका के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार गमिनी दिसानायके की हत्या, लड़ाई फिर शुरू।
-दिसंबर 1995 में जाफना पर से नियंत्रण खोया।
-जुलाई 1996 में 72 घंटों के भीतर 1200 जवानों की हत्या।
-1997-99 के बीच उत्तरी व पूर्वी श्रीलंका के एक बड़े हिस्से पर कब्जा जमाया।
- दिसंबर 1999 में राष्ट्रपति कुमारतंगा बाल-बाल बचे लेकिन एक अंग गंवा बैठे।
-जुलाई 2001 में लिट्टे के आत्मघाती हमलावरों ने श्रीलंका के एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय हवाई हड्डे पर हमला किया और 13 विमानों को नष्ट कर दिया।
-फरवरी 2002 में नार्वे की पहल पर शांति समझौते पर दस्तखत किया।
-अप्रैल 2003 में शांति समझौता खत्म कर दिया।
-अगस्त 2005 में श्रीलंका के विदेश मंत्री लक्ष्मण कादिरगमर की हत्या।
-अप्रैल 2006 में आत्मघाती हमले में श्रीलंका के सेना प्रमुख सरथ फोंसेका घायल।
-2007 में कोलंबो के पास हवाई हमला।
-जनवरी 2009 में लिट्टे के कब्जे से किलिनोच्ची मुक्त।
-17 मई 2009 में अपनी बंदूकें शांत करने का निर्णय।
-18 मई 2009 युद्ध क्षेत्र से भागने की कोशिश में प्रभाकरन मारा गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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