उत्तर प्रदेश ने एक निर्दलीय सांसद को जिताने की परंपरा बरकरार रखी
1996 के लोकसभा चुनाव के बाद से यह लगातार पांचवां अवसर है जब प्रदेश से केवल एक निर्दलीय सांसद देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंच है।
इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बागी एवं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह प्रदेश में एक मात्र निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज कर पाए हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्थन से एटा संसदीय सीट पर कल्याण ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार एवं वर्तमान सांसद देवेंद्र सिंह नागपाल को करीब 1.28 लाख वोटों से हराया।
इस साल उत्तर प्रदेश में 563 निर्दलीय उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने के लिए चुनाव मैदान में थे।
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में अमरोहा सीट से हरीश नागपाल निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए थे। उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के उम्मीदवार महमूद मदनी को पराजित किया था।
वर्ष 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी प्रदेश से एकमात्र निर्दलीय सांसद थीं जिन्हें पीलीभीत संसदीय क्षेत्र से जिताकर जनता ने संसद भेजा था।
1996 के लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय ने प्रदेश की घोसी (मऊ) संसदीय सीट से अकेले निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीते थे। बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गये थे।
हालांकि 1991 के लोक सभा चुनाव में प्रदेश में किसी निर्दलीय उम्मीदवार की जीत नहीं हुई थी, लेकिन 1989 के आम चुनाव में बलरामपुर सीट पर फैसुर्लहमान उर्फ मुन्ना ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications