उत्तर प्रदेश में नाकाम रहे राजघरानों के वारिस
लखनऊ, 18 मई(आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में कई राजघरानों के वंशज संसद पहुंचने की ललक लिए चुनावी मैदान में कूदे थे लेकिन उनमें से ज्यादातर को प्रदेश की जनता ने नकार दिया।
इस बार के लोकसभा चुनाव में करीब 10 राजघरानों के वारिस चुनाव मैदान में थे। परंतु प्रतापगढ़ काला कांकर स्टेट से ताल्लुक रखने वाली राजकुमारी रत्ना सिंह, अमेठी राजघराने के संजय सिंह और पडरौना रियासत के कुंवर आर. पी. एन. सिंह को ही कामयाबी मिल सकी मिली। उल्लेखनीय है कि ये तीनों कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे थे।
कांग्रेस उम्मीदवार रत्ना सिंह ने प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर अपने परंपरागत प्रतिद्वंदी और भदरी राजघराने के वारिस एवं समाजवादी पार्टी प्रत्याशी अक्षय प्रताप सिंह को हराया। सुल्तानपुर सीट पर संजय सिंह ने बहुजन समाज पार्टी(बसपा) के मोहम्मद ताहिर को और आर. पी. एन. सिंह ने कुशीनगर लोकसभा सीट पर बसपा के प्रदेश अध्यक्ष व राज्य के सहकारिता मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को हराने में सफलता पाई।
जिन राजघरानों के वारिसों को हार का मुंह देखना पड़ा उनमें अयोध्या के राजा विमलेंद्र मोहन मिश्रा, गोंडा की मनकापुर रियासत के कीर्तिवर्धन सिंह, बाह राजघराने के अरिदमन सिंह, राजस्थान की डूंगरपुर रियासत के कुंवर मानवेंद्र सिंह, बांसी राजघराने के जय प्रताप सिंह एवं रामपुर की नवाबी खानदान की बेगम नूर बानो प्रमुख हैं।
फैजाबाद सीट पर बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले विमलेंद्र मोहन मिश्रा को कांग्रेस के निर्मल खत्री से हार का सामना करना पड़ा था। गोंडा में कांग्रेस के उम्मीदवार बेनी प्रसाद वर्मा ने बसपा के कीर्तिवर्धन को हराया। फतेहपुर सीकरी संसदीय सीट पर भाजपा से चुनावी मैदान में उतरे अरिदमन सिंह को बसपा की सीमा उपाध्याय से हार का सामना करना पड़ा। मथुरा में कांग्रेस के प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह को राष्ट्रीय लोक दल(रालोद) के जयंत चौधरी ने हराया। रामपुर सीट पर कांग्रेस की उम्मीदवार बेगम नूर बानो को सपा की जयाप्रदा ने पराजित किया। डुमरियागंज में जय प्रताप सिंह को कांग्रेस उम्मीदवार जगदंबिका पाल ने हराया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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