विद्रोहियों की 'युद्धविराम' की घोषणा

तमिल विद्रोहियों का वजूद पूर्वोत्तर इलाक़े में एक छोटे से हिस्से में बचा हुआ था.
तमिल समर्थक वेबसाइट तमिलनेट का का कहना है कि सरकार की ओर से जारी भारी कार्रवाई की वजह से तमिल विद्रोहियों ने अपनी ओर से लड़ाई बंद करने का फ़ैसला किया है.
विद्रोहियों के मुताबिक वो आम तमिल नागरिकों के हित में ये क़दम उठा रहे हैं.
एलटीटीई के अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रमुख सेलवरासा पथमनाथन ने एक बयान में कहा, "यह लड़ाई अपनी कड़वी अंत तक पहुँच गया है"
ग़ौरतलब है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ 26 साल चली लड़ाई के बाद अपनी जीत की घोषणा कर दी है.
उधर श्रीलंका में सैन्य अधिकारियों का कहना है कि युद्ध क्षेत्र में फँसे हुए सभी तमिल नागिरक सुरक्षित बाहर निकल गए हैं.
'युद्ध क्षेत्र में तमिल नागिरक नहीं'
सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानायाकारा का कहना है कि पिछले तीन दिनों में क़रीब 50 हज़ार तमिल आबादी युद्ध क्षेत्र से बाहर निकलने में कामयाब रहे हैं, हालांकि सेना के इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी.
पिछले कई महीनों से पूर्वोत्तर श्रीलंका में सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच घमासान जारी है जिसकी वजह से युद्ध क्षेत्र में हज़ारों लोग फँसे हुए हैं.
इससे पहले ब्रिगेडियर उदय नानायक्कारा ने दावा किया था कि सेना ने फ़रार होने की कोशिश करने वाले 70 तमिल विद्रोहियों को मार गिराया है.
सेना का कहना है कि उसने सुमद्र तक एलटीटीई विद्रोहियों की पहुँच को समाप्त कर दिया है.
कोलंबो में मौजूद बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैविलेंड का कहना है कि यहाँ ख़बरें हैं कि अब युद्ध क्षेत्र में आम नागिरक फंसे हुए नहीं हुए हैं, जिसका अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्वागत करेगा, हालाँकि इसकी पुष्टि होनी बाक़ी है.
चार्ल्स हैविलेंड के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया, "अगर ऐसा है तो हमें राहत मिलेगी."
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पिछले जनवरी से अबतक सेना और विद्रोहियों की लड़ाई में छह हज़ार से अधिक लोग मारे गए है. जबकि माना जाता है कि पिछले 26 साल में इस लड़ाई में 70 हज़ार लोग मारे गए है.


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