यूपीए की जीत, पद छोड़ना चाहते हैं आडवाणी

भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है और भाजपा ने हार स्वीकार भी कर ली है.
राज्यवार चुनावी नतीजे
क्या कहते हैं प्रमुख चेहरे
कहीं ख़ुशी कहीं ग़म
कौन जीता कौन हारा
जिन उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है, उनमें प्रमुख हैं- रायबरेली से कांग्रेस की सोनिया गांधी, आँवला से भाजपा की मेनका गांधी, पटना साहिब से भाजपा उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा, विदिशा से भाजपा नेता सुषमा स्वराज, छिंदवाड़ा से कांग्रेस नेता कमलनाथ, अमृतसर से भाजपा नेता नवजोत सिंह सिद्धू, श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ़्रेंस के फ़ारूख़ अब्दुल्लाह, अजमेर से कांग्रेस के सचिन पायलट, मुंबई नॉर्थ सेंट्रल से कांग्रेस की प्रिया दत्त.
रामपुर सीट से समाजवादी पार्टी की जयाप्रदा चुनाव जीत गई हैं. प्रजाराज्यम पार्टी के प्रमुख अभिनेता चिरंजीवी तिरुपति से चुनाव जीते हैं.
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा सिंहभूमि से जीत गए हैं. वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े थे. पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा भी हासन से चुनाव जीत गए हैं.
जीतने वाले प्रमुख उम्मीदवार सोनिया गांधी (कांग्रेस)- रायबरेली मेनका गांधी (भाजपा)- औंला शत्रुघ्न सिन्हा (भाजपा)- पटना साहिब कमलनाथ (कांग्रेस)- छिंदवाड़ा फ़ारूख़ अब्दुल्लाह (एनसी)- श्रीनगर प्रिया दत्त (कांग्रेस)- मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सचिन पायलट (कांग्रेस)- अजमेर सुषमा स्वराज (भाजपा)- विदिशा नवजोत सिंह सिद्धू (भाजपा)- अमृतसर जयाप्रदा (सपा)- रामपुर एचडी देवगौड़ा (जेडी एस)- हासन मोहम्मद अज़हरुद्दीन (कांग्रेस)- मुरादाबाद ममता बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस)- कोलकाता दक्षिण जसवंत सिंह (भाजपा)- दार्जीलिंग वीरभद्र सिंह (कांग्रेस)- मंडी शशि थरूर (कांग्रेस)- तिरुअनंतपुरम अजित सिंह (राष्ट्रीय लोकदल)- बागपत लालजी टंडन (भाजपा)- लखनऊ राजनाथ सिंह (भाजपा)- ग़ाज़ियाबाद
पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अज़हरुद्दीन मुरादाबाद से जीत गए हैं. कोलकाता दक्षिण से तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी भी जीत गई हैं.
भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह दार्जिलिंग से चुनाव जीत गए हैं. भागलपुर से भाजपा के सैयद शाहनवाज़ हुसैन जीत गए हैं. हिमाचल प्रदेश की मंडी संसदीय सीट से पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह चुनाव जीत गए हैं.
तिरुअनंतपुरम से कांग्रेस के शशि थरूर ने जीत हासिल की है. ग्वालियर से भाजपा की यशोधरा राजे सिंधिया जीत गई हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह एटा से चुनाव जीत गए हैं.
वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे थे. समाजवादी पार्टी उनका समर्थन कर रही थी. राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह बागपत से जीत गए हैं.
लखनऊ से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार लालजी टंडन विजयी हुए हैं. तो भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ग़ाज़ियाबाद से चुनाव जीत गए हैं.
कई दिग्गजों को इस चुनाव में भारी झटका लगा है. वर्षों से हाजीपुर की सीट से चुनाव जीत रहे लोकजनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान हार गए हैं. यहाँ से जनता दल (यूनाइटेड) के रामसुंदर दास विजयी हुए हैं.
लालू प्रसाद भी पाटलिपुत्र सीट से हार गए हैं. उन्हें जनता दल (यूनाइटेड) के रंजन यादव ने हराया. हालांकि लालू प्रसाद सारन सीट से चुनाव जीत गए हैं. सारन में उन्होंने बीजेपी के राजीव प्रताप रुढ़ी को हराया है.
एक और केंद्रीय मंत्री रेणुका चौधरी खम्मम से हार गई हैं. बाड़मेर से भाजपा के मानवेंद्र सिंह चुनाव हार गए हैं.
'काम का इनाम'
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यूपीए की जीत पर देश की जनता को धन्यवाद दिया है और कहा है कि ये सरकार के अच्छे काम का ईनाम है.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत के लोगों ने बड़ी बुलंदी से अपनी बात कही है. सांप्रदायिक घृणा से मुक्त प्रशासन या सरकार के लिए उन्होंने मत दिया है."
भारत के लोगों ने बड़ी बुलंदी से अपनी बात कही है. सांप्रदायिक घृणा से मुक्त प्रशासन या सरकार के लिए उन्होंने मत दिया है मनमोहन सिंह
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मनमोहन सिंह ने कहा कि वे कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को मंत्रिमंडल का सदस्य बनने के लिए कहेंगे.
दूसरी ओर सुल्तानपुर में संवाददाताओं से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उनका काम संगठन को मज़बूत बनाना है.
उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश देश का सबसे अगली पंक्ति का राज्य रहा है और इसे फिर से पहले स्थान पर लाना है. 20-21 सीटों की जीत राज्य में पार्टी के फिर से खड़े होने की शुरुआत भर है. यह सिलसिला अब और आगे बढ़ेगा."
राहुल ने कहा कि वे जीतें या हारें, इससे उन्हें फ़र्क नहीं पड़ता. उनका काम संगठन को मज़बूत करना है और वे इस काम को ऐसे ही करते रहेंगे.
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने हार स्वीकार की है और कांग्रेस पार्टी को बधाई दी है. पार्टी प्रवक्ता अरुण जेटली ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लालकृष्ण आडवाणी ने विपक्ष के नेता का पद छोड़ने की मंशा ज़ाहिर की है. लेकिन पार्टी ने इसे मंज़ूरी नहीं दी है.
जश्न
यूपीए की बढ़त की ख़बर आते ही नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में जश्न का माहौल हो गया. जम कर नारेबाज़ी हुई, मिठाइयाँ बाँटी गई और पटाखे छोड़े गए.
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे शानदार जीत बताया है. ख़ुशी से गदगद नज़र आ रहे केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के नेता ऑस्कर फ़र्नांडीस ने कहा- मनमोहन सिंह देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे.
कांग्रेस मुख्यालय से अलग भाजपा मुख्यालय पर निराशा का आलम है. पार्टी प्रवक्ता वेंकैया नायडू ने माना कि पार्टी नतीजों से निराशा हुई है.
उन्होंने कहा कि पार्टी नतीजों की समीक्षा करेगी.
बिहार के नतीजे
पटना से बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर का कहना है कि बिहार में आपराधिक छवि वाले नेताओं और उनके रिश्तेदारों को इस चुनाव में मुँह की खानी पड़ी है.
शहाबुद्दीन की पत्नी सिवान से हार गई हैं
बाहुबली राजनेता समझे जाने वाले राष्ट्रीय जनता दल के मोहम्मद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब सिवान से हार गई हैं.
सुपौल में पप्पू यादव की पत्नी रंजीता रंजन और पुर्णिया से उनकी माँ शांति प्रिया चुनाव हार गई हैं. नवादा से सूरजभान की पत्नी और शिवहर से आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद को भी हार का मुँह देखना पड़ा है.
महाराजगंज से प्रभुनाथ सिंह हार गए हैं तो किशनगंज में मोहम्मद तसलीमुद्दीन भी हार गए हैं. वैशाली से मुन्ना शुक्ला भी हार गए हैं तो अररिया से ज़ाकिर हुसैन ख़ान भी परास्त हो गए हैं.
इस बार चुनाव में बिहार से वामदंथी दलों को एक भी सीट नहीं मिल पाई है. इस बार वामपंथी दलों ने राज्य में मिलकर चुनाव लड़ा था. लेकिन उन्हें एक भी सीट नहीं मिल पाई.
रामविलास पासवन की लोकजनशक्ति पार्टी भी अपना खाता नहीं खोल पाई. पासवान ख़ुद हाजीपुर से हार गए हैं. इस सीट से पासवान आठ बार चुनाव जीते थे. लेकिन इस बार 88 वर्षीय राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रामसुंदर दास से जीत नहीं पाए.
बिहार जनता दल (यूनाइटेड) के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ था. लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह (लल्लन सिंह) दोनों ने अपनी-अपनी सीटें जीत ली हैं.
बिहार से दो सीटें निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीती. लेकिन अजीब बात ये रही कि ये दोनों चुनाव से पहले जनता दल (यू) के सदस्य थे. पार्टी से टिकट नहीं मिलने के कारण दिग्विजय सिंह और ओम प्रकाश यादव ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीते.
फ़िल्म जगत से जुड़े लोगों की बात करें तो शत्रुघ्न सिन्हा चुनाव जीत गए लेकिन शेखर सुमन और प्रकाश झा को हार का मुँह देखना पड़ा.


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