मध्य प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन

2004 आम चुनाओं में पार्टी को 29 में से महज़ चार सीटें प्राप्त हुई थीं.
जहाँ इस बार देश भर में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन को पार्टी राहुल गाँधी की मेहनत और उनकी टीम द्वारा तैयार की गयी बेहतर रणनीति का नतीजा बता रही है कुछ उसी तर्ज़ पर कुछ लोग राज्य में पार्टी के प्रदर्शन को 'युवा शक्ति' की जीत मान रहे हैं.
कांग्रेस द्वारा जीती गयीं 12 में से कम से कम आधा दर्जन ऐसे संसदीय क्षेत्र हैं जहाँ कांग्रेस के युवा उम्मीदवारों ने भारतीय जनता पार्टी के दिग्गजों को पछाड़ा है.
युवा उम्मीदवार प्रेम चांद गुड्डू ने उज्जैन से आठ बार सांसद रह चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया को हराया तो अरुण यादव ने नन्द कुमार सिंह चौहान को पछाड़ दी.
बीजेपी के अन्य दिगज नेता थावर चाँद गहलोत और लक्ष्मी नारायण पाण्डेय को भी कांग्रेस के युवा प्रत्याशियों से पटखनी खानी पड़ी और हर जगह वोटरों ने एक ही सवाल उठाया "लम्बे समय तक बार बार जीतने के बाद आपने क्षेत्र के लिए क्या किया?"
पार्टी का गढ़ कहे जाने वाले मालवा क्षेत्र में कांग्रेस को छ सीटें मिली.
इलाके में पानी की बड़ी कमी एक बड़े मुद्दे की तरह उभरी. उज्जैन जैसे शहर में नागरिकों को महीनों से पांच दिनों में एक बार पानी मिलता है.
मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने निवास स्थान पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह जनादेश का आदर करते हैं और केंद्र सरकार के साथ राज्य के हितों को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा.
मुख्य मंत्री ने केंद्र की मध्य प्रदेश के प्रति कथित भेद भाव की नीति को चुनाव का मुद्दा बनाया था.
इस बीच ग्वालियर से नव निर्वाचित सांसद और पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने अपने एक ब्यान में 'संगठन की कमियों' को बीजेपी के ख़राब प्रदर्शन के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.
कुछ हलकों में इस बयान को मुख्य मंत्री, राज्य पार्टी अध्यक्ष और राज्य की चुनाव प्रभारी सुषमा स्वराज पर प्रहार माना जा रहा है.
कुछ इसी तरह का बयान मगर इसमें चोट सीधे पार्टी के प्रधान मंत्री के उम्मीदवार लाल कृष्ण आडवाणी पर था. छत्तीसगढ़ के बुजुर्ग नेता और एक बार फिर बस्तर से चुनाव जीते सांसद बलिराम कश्यप ने कहा है कि बीजेपी का आडवाणी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर घोषित करना ग़लत कदम था.
हालाँकि राज्य के मुख्य मंत्री रमण सिंह ने कहा है कि यह आदिवासी नेता की व्यक्तिगत राय हो सकती है.
छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने ग्यारह में से दस सीटें जीत कर अपने पिछले प्रदर्शन को दुहराया है.
राजनितिक विश्लेषक रुचिर गर्ग का कहना है कि यह रमण सिंह के चुनाव प्रबंधन और उनकी छवि की जीत है.
राज्य के विधि और संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इसे विकास की जीत बताया मगर यह पूछे जाने पर की क्या इसका मतलब है जनता का मंदिर और घोर हिंदुत्व के मुद्दे को नकार देना?
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मंदिर वगेरह राज्य में कोई मुद्दा ही नहीं था.
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर निर्वाचा क्षेत्र से हालाँकि पूर्व मुख्य मंत्री अजित जोगी की पत्नी रेनू जोगी जो कांग्रेस उम्मीदवार थीं चुनाव हार गयी हैं उनके विरोधी बी जे पी के दिलीप सिंह जूदेव ने पूरा चुनाव चर्च बनाम मंदिर के नाम पर लड़ा था.
दिलीप सिंह जूदेव बिलासपुर से चुनाव जीत गए हैं.


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