लिट्टे का सैन्य संघर्ष समाप्त, प्रभाकरन को लेकर सवाल बरकरार (राउंडअप)
संगठन की ओर से वेबसाइट 'तमिलनेट' पर एक बयान जारी किया गया है जिसमें संघर्ष खत्म करने के निर्णय का जिक्र है। संगठन ने इस बयान में कहा कि तमिलों के लिए अलग राष्ट्र के पक्ष में उसके द्वारा वर्षो से जारी सशस्त्र संघर्ष का कड़वा अंत हो गया है।
बयान में कहा है, "इस जंग का कड़वा अंत हो गया है। हमने अपनी बंदूकों को अब खामोश रखने का फैसला कर लिया है।" यह बयान संगठन के अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग के प्रमुख सेलवरासा पथमनाथन ने जारी किया है।
उधर वर्ष 1976 में लिट्टे की स्थापना करने वाले प्रभाकरन (54 वर्ष) की मौत के मामले में संदेह बरकरार है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि प्रभाकरन के बारे में कोई सूचना नहीं है लेकिन कुछ सूत्रों के अनुसार वह अब जीवित नहीं है।
सेना के अधिकारियों ने विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके से सभी नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिए जाने की घोषणा की है। रविवार को करीब 12,000 नागरिक सुरक्षित बाहर निकाले गए। पिछले 72 घंटे में युद्धक्षेत्र से करीब 72,000 लोग निकले हैं।
ये आंकड़ें सरकार के अनुमानों से काफी अधिक है। सरकार का मानना था कि युद्धक्षेत्र में केवल 20,000 नागरिक फंसे हैं।
इससे पहले दिन में सेना ने लिट्टे के एक अन्य हमले को विफल करते हुए उनकी सात नौकाएं नष्ट करने के साथ ही कम से कम 70 लिट्टे आतंकवादियों को मार गिराया।
ब्रिगेडियर उदय नानायक्कारा ने कहा कि विद्रोहियों ने पहले नागरिक होने का दिखावा किया, एक झील को पार किया और सेना की रक्षा पंक्ति को तोड़ने का प्रयास किया। परंतु उनको मार गिराया गया। उन्होंने यह नहीं बताया कि सेना को कोई नुकसान हुआ या नहीं।
रक्षा मंत्रालय ने लड़ाई की वर्तमान स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी, यद्यपि सैनिक सूत्रों के अनुसार युद्धक्षेत्र में अभियान अभी भी जारी है।
उधर रविवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का जार्डन से स्वदेश लौटने पर हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत किया गया। राजपक्षे ने शनिवार को विदेश में ही तमिल विद्रोहियों की पराजय की घोषणा की थी, लेकिन स्वदेश वापसी के बाद उन्होंने कोई बयान नहीं दिया।
राजपक्षे के रविवार को राष्ट्र को संबोधित करने की आशा थी परंतु सूचना विभाग ने कहा कि वह मंगलवार को संसद से देश को संबोधित करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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