वाम दलों से मुक्त नई सरकार की विदेश नीति ज्यादा धारदार होगी
नई दिल्ली, 17 मई (आईएएनएस)। नए जनादेश के साथ सत्ता में लौटे संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की विदेश नीति ज्यादा धारदार होगी। ऐसे में जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई गठबंधन सरकार वाम दलों के दबाव से मुक्त होगी, वह ज्यादा मजबूती से चीन और पाकिस्तान समेत सभी पड़ोसी मुल्कों द्वारा पेश चुनौतियों से निपटेगी, वहीं अमेरिका के प्रति अपनी नीति को वांछित दिशा देने में भी उसे सहूलियत होगी।
अस्पष्ट जनादेश की संभावना ने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया था। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस जनादेश से सरकार के लिए धारदार विदेश नीति पर अमल करना आसान होगा।
पूर्व विदेश सचिव ललित मानसिंह कहते हैं,"ऐसे में जब जनादेश स्पष्ट है और दबाव बनाए रखने के आदी वाम दलों का सरकार पर से साया हट गया है, भारत की विदेश नीति में निश्चित तौर पर बदलाव आएगा। प्रधानमंत्री अधिक सकारात्मक विदेश नीति पर अमल करेंगे। वैश्विक मंच पर भारत की उपस्थिति अब कहीं और ज्यादा दिखेगी। इससे सरकार की नीतियों में एकरूपता आएगी। सरकार ने पिछले कार्यकाल के दौरान जो पहल की थी, उसे जारी रखने में ज्यादा सहूलियत होगी।"
वाम दलों से सरकार का पिंड छुड़ने पर अमेरिका ने भी राहत की सांस ली है। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस चुनावी नतीजे को ऐतिहासिक करार देते हुए भारतीय लोकतंत्र की तारीफ की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते में और गर्मजोशी आएगी।
पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रहे जी.पार्थसारथी भी मानते हैं कि इस जनादेश से भारत की विदेश नीति ज्यादा धारदार होगी। वैसे, उनका यह भी मानना है कि जब तक पाकिस्तान मुंबई कांड के दोषियों को कटघरे में खड़ा करने की ईमानदार कोशिश नहीं करता तब तक निकट भविष्य में भारत के साथ उसका रिश्ता पटरी पर नहीं लौटेगा। नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, चीन आदि के प्रति विदेश नीति ज्यादा सकारात्मक होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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