लिट्टे की बंदूकें हुईं खामोश (लीड-2)

ऐसे में जब सेना लिट्टे के अभेद्य समझे जाने वाले गढ़ों को फतह कर चुकी है, संगठन के लिए सशस्त्र प्रतिरोध जारी रखना बेहद कठिन हो गया था। संगठन की ओर से तमिलनेट वेबसाइट पर एक बयान जारी किया गया है जिसमें उपरोक्त निर्णय का जिक्र है। संगठन ने इस बयान में कहा कि तमिलों के लिए अलग राष्ट्र के पक्ष में उसके द्वारा वर्षो से जारी सशस्त्र संघर्ष का कड़वा अंत हो गया है।

बयान में कहा है, "इस जंग का कड़वा अंत हो गया है। हमने अपनी बंदूकों को अब खामोश रखने का फैसला कर लिया है।" यह बयान संगठन के अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग के प्रमुख एस. पठमनथन ने जारी किया है।

श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे द्वारा लिट्टे की हार की आधिकारिक घोषणा के बाद लिट्टे की ओर से जारी इस बयान में कहा गया है, "हमें लोगों के मारे जाने का अफसोस है। हम इस संघर्ष को अंजाम तक पहुंचाने में असफल रहे।" इस बीच यह अफवाह जोरों पर है कि लिट्टे के नेता वी. प्रभाकरन की मौत हो गई है। वैसे, इस बारे में यह वेबसाइट खामोश है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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