लेबर पार्टी के प्रति स्वराज पॉल का लगाव बरकरार
कई सांसदों, जिनमें लेबर पार्टी के सांसदों की संख्या ज्यादा है, द्वारा सरकारी खर्च के फर्जी बिल जमा किए जाने का मामला तूल पकड़ने के कारण उद्योगपतियों ने लेबर पार्टी की ओर से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है। डेली टेलीग्राफ ने सबसे पहले इस घोटाले का खुलासा किया था। लेबर सरकार में मंत्री शाहिद मलिक को इस घोटाले में संलिप्तता के कारण पद से इस्तीफा देना पड़ा है।
लेबर पार्टी पर मोटे चंदे के बदले उद्योगपतियों को सरकारी पद व जिम्मेवारी देने के आरोप पहले से ही लगते रहे हैं। पॉलिटिक्सहोम.कॉम ने कुछ उद्योगपतियों की राय ली है और अधिकांश ने लेबर पार्टी को चंदा देना जारी नहीं रखने का फैसला किया है। पार्टी को 30,000 पाउंड का चंदा देने वाले उद्योगपति मोनी वर्मा ने कहा, "राजनीति में जो कुछ हो रहा है वह निंदनीय है। मैं चंदा देने से परहेज करूंगा।" प्रसिद्ध उद्यमी सर गुलाम नून इस मुद्दे पर अनिर्णय की स्थिति में हैं, पर स्वराज पॉल कहते हैं कि वह पार्टी की मदद करते रहेंगे। वैसे, वह मानते हैं कि पार्टी के सांसदों के इस आचरण से जनता को सदमा पहुंचा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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