उद्योग जगत को अगली सरकार से काफी उम्मीदें
आगामी सरकार से उद्योग जगत की खास उम्मीद का आधार यह है कि इस बार वाम दलों की हेकड़ी सरकार के आर्थिक एजेंडे को प्रभावित नहीं कर पाएगी। सरकार को इन दलों ने कई ठोस सुधारवादी कदम उठाने से रोके रखा और इसका खामियाजा उद्योग जगत को हुआ। कारपोरेट क्षेत्र का मानना है कि इस बार की सरकार का कदम ज्यादा प्रगतिशील और उदारवादी होगा।
भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ(फिक्की) के अध्यक्ष हर्ष पति सिंघानिया ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "पेंशन, बीमा, बैंकिंग, निवेश, श्रम, रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी, खुदरा कारोबार क्षेत्र जैसे कुछ अहम मोर्चो पर सरकार ज्यादा ठोस कदम उठा सकती है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जो वर्षो से सुधार का इंतजार कर रहे हैं।"
वश्विक परामर्शदाता कंपनी केपीएमजी के कार्यकारी निदेशक अरविंद महाजन कहते हैं, "इस चुनावी परिणाम से निश्चित तौर आर्थिक माहौल सकारात्मक रूप से प्रभावित होगा। मुझे लगता है कि अगले 6 महीनों में अर्थव्यवस्था 7 फीसदी की विकास दर के रास्ते पर लौट आएगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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