श्रीलंका के युद्ध क्षेत्र में श्रृंखलाबद्ध विस्फोट (राउंडअप)
राजपक्षे की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सरकारी टेलीविजन चैनल और रेडियो ने खबर दी है कि युद्ध क्षेत्र से श्रृंखलाबद्ध विस्फोटों की आवाजें सुनी गई हैं और कुछ बंकरों में विद्रोहियों के नेता छुपे हुए हैं।
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक राजपक्षे ने कहा, "मुझे यह घोषणा करने में गर्व का अनुभव हो रहा है कि हमारी सरकार ने अपनी सेना के पूर्ण सहयोग से लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) को सैन्य रूप से पराजित कर दिया है।"
राजपक्षे ने यह दावा जार्डन में 11 देशों के समूह के शिखर सम्मेलन में प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए किया। उनके बयान के अंश कोलंबो में उपलब्ध कराए गए हैं।
सेना के मुख्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय ननायक्करा ने कहा है कि विद्रोहियों के वरिष्ठ नेतृत्व के मारे जाने की पुष्टि वे तत्काल नहीं कर सकते।
दूसरी ओर सेना द्वारा शनिवार को लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम(लिट्टे) के कब्जे वाले आखिरी तटीय इलाके पर कब्जा करने के बाद यहां से नागरिकों का पलायन जारी है। अब लिट्टे के कब्जे वाला इलाका एक वर्ग किलोमीटर से भी कम दायरे में सिमट कर रह गया है।
सेना के अधिकारियों ने बताया है कि शनिवार को लगभग 5,000 नागरिक इस इलाके से बाहर निकले हैं। पिछले दो दिनों में लगभग 17,500 नागरिक इस इलाके को छोड़ चुके हैं।
इससे पहले श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया कि सेना ने तमिल विद्रोहियों के आखिरी इलाके को अपने कब्जे में ले लिया है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार पहली बार ऐसा हुआ है जब लिट्टे की पहुंच समुद्र से कट गई है। सेना ने दावा किया है कि लिट्टे प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन और उसके वरिष्ठ सहयोगी अभी विद्रोहियों द्वारा नियंत्रित क्षेत्र में हैं।
कोलंबो से 395 किलोमीटर पूर्वोत्तर में स्थित कारियालमुल्लइविक्कल गांव से जुड़े तटीय इलाके पर सेना ने कब्जा कर लिया है।
गौरतलब है कि युद्ध क्षेत्र में अभी भी हजारों लोगों के फंसे होने की आशंका है।
उधर, संयुक्त राष्ट्र ने उत्तरी श्रीलंका के युद्धग्रस्त इलाके के 'कब्रगाह' बन जाने की चेतावनी दी है।
संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार उच्चायोग के प्रवक्ता रूपर्ट कोलविले ने एक समिति बनाने की बात कही जो संभावित युद्ध अपराधों की जांच करे।
उन्होंने कहा कि अगर उत्तरी श्रीलंका का तटीय इलाका अब तक 'कब्रगाह' में परिवर्तित नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा होने की आशंका है।
संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों का अनुमान है कि इस साल जनवरी से लेकर अब तक 7,000 से 8,000 नागरिक श्रीलंका में मारे जा चुके हैं।
श्रीलंका सरकार के मुताबिक 20,000 और संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के मुताबिक 50,000 लोग अब भी युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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