उड़ीसाः बाहर होती दिख रही है भाजपा

उड़ीसा में रुझानों ने साफ़ कर दिया है कि नवीन पटनायक और मज़बूत होंगे. वहीं हैदराबाद में विधानसभा की तस्वीर पहली बार त्रिशंकु होती नज़र आ रही है. वहीं आंध्र प्रदेश पहली बार एक त्रिशंकु विधानसभा की ओर जाता हुआ दिखाई दे रहा है. राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 128 पर कांग्रेस और टीडीपी गठबंधन 130 सीटों पर आगे जाते दिख रहे हैं.
चिरंजीवी की प्रजा राज्यम पार्टी को 25 सीटों पर बढ़त मिल रही है. प्रजा राज्यम पार्टी पहले ही कांग्रेस को समर्थन के संकेत दे चुकी है और माना जा रहा है कि उनके और एमआईएम के समर्थन से कांग्रेस के नेतृत्ववाली सरकार आंध्रप्रदेश में आ सकती है.
उड़ीसा से अभी तक मिले रुझानों में राज्य विधानसभा की 147 सीटों में से 99 पर नवीन पटनायक के नेतृत्ववाली पार्टी, बीजू जनता दल को बढ़त मिलती नज़र आ रही है.राज्य में सरकार बनाने के लिए 74 सीटों पर जीत की ज़रूरत है. अगर रुझानों का रुख यही रहा तो नवीन पटनायक के लिए राज्य में सत्ता पर बने रहना आसान हो जाएगा.
बाकी विधानसभा सीटों में से 30 के रुझान कांग्रेस के पक्ष में, 12 के रुझान भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में और बाकी सीटों पर अन्य राजनीतिक दल या निर्दलीय आगे आते दिख रहे हैं.
बनते-बिगड़ते समीकरण
चिरंजीवी की पार्टी ने कांग्रेस का साथ देने के संकेत दिए थे. वहीं भाजपा को संसदीय चुनावों में भी राज्य के संसदीय क्षेत्रों से मुंह की खानी पड़ी है. राज्य में कुल 21 लोकसभा सीटें हैं. इनमें से बीजू जनता दल को 15 सीटों पर बढ़त हासिल है.भाजपा केवल एक सीट पर शुरुआती रुझानों में आगे थी, अब वहाँ भी पिछड़ती नज़र आ रही है. फिलहाल पाँच सीटों पर कांग्रेस पार्टी और एक सीट पर सीपीआई आगे दिखाई दे रही है.
ग़ौरतलब है कि राज्य में भाजपा के समर्थन से सत्ता की कुर्सी पर बैठे नवीन पटनायक ने पिछले दिनों भाजपा से नाता तोड़ दिया था. कंधमाल के मुद्दे पर सांप्रदायिक हिंसा और ध्रुवीकरण के तर्कों के आधार पर नवीन भाजपा से अलग हुए थे.भाजपा के लिए यह एक झटका था पर पार्टी को इतने ख़राब प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी जितनी कि ताज़ा रुझानों में देखने को मिल रही है.
अभी यह कहना जल्दबाज़ी ज़रूर है कि नवीन पटनायक राज्य में सत्ता बनाए रखने के लिए ज़रूर बहुमत पा जाएंगे पर पिछले दिनों कांग्रेस के साथ उनकी चल रही अनौपचारिक बातचीत और नज़दीकी उनके लिए रास्ते को आसान ही दिखाती है.विशेषज्ञों के अनुसार बहुमत से कुछ अंक चूक जाने की स्थिति में भी नवीन के लिए रास्ता कठिन नहीं होगा. बदले में वो केंद्र में कांग्रेस नेतृत्ववाले गठबंधन को समर्थन दे सकते हैं.


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