लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और यूपीए की 'जय हुई'

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और यूपीए की 'जय हुई'

भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है और भाजपा ने हार स्वीकार भी कर ली है.

ताज़ा जानकारी के मुताबिक़ यूपीए 55 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है और 205 सीटों पर गठबंधन के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं.

राजग को अभी तक 33 सीटें मिली हैं और 127 सीटों पर उसके उम्मीदवार आगे हैं.

बढ़त और ताज़ा रुझानों की मानें तो यूपीए अभी भी स्पष्ट बहुमत से दूर लगता है लेकिन जानकारों के मुताबिक़ यूपीए सरकार बनाने की स्थिति में है.

यूपीए की बढ़त की ख़बर आते ही नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में जश्न का माहौल हो गया. जम कर नारेबाज़ी हुई, मिठाइयाँ बाँटी गई और पटाखे छोड़े गए.

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे शानदार जीत बताया है. ख़ुशी से गदगद नज़र आ रहे केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के नेता ऑस्कर फ़र्नांडीस ने कहा- मनमोहन सिंह देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे.

कांग्रेस मुख्यालय से अलग भाजपा मुख्यालय पर निराशा का आलम है. पार्टी प्रवक्ता वेंकैया नायडू ने माना कि पार्टी नतीजों से निराशा हुई है.

उन्होंने कहा, "हम नतीजों की समीक्षा करेंगे. लेकिन मैं इससे सहमत हूँ कि हमें निराशा हुई है."

जिन उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है, उनमें प्रमुख हैं पटना साहिब से भाजपा उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा, विदिशा से भाजपा नेता सुषमा स्वराज, छिंदवाड़ा से कांग्रेस नेता कमलनाथ, अमृतसर से भाजपा नेता नवजोत सिंह सिद्धू, श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ़्रेंस के फ़ारूख़ अब्दुल्लाह, अजमेर से कांग्रेस के सचिन पायलट, मुंबई नॉर्थ सेंट्रल से कांग्रेस की प्रिया दत्त.

कई दिग्गजों को इस चुनाव में भारी झटका लगा है. इनमें प्रमुख हैं वित्त मंत्री पी चिदंबरम, जो शिवगंगा से चुनाव हार गए हैं. भाजपा की मेनका गांधी आँवला से हार गई हैं.

पासवान पीछे

बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर के अनुसार बिहार के हाजीपुर से रामविलास पासवान पीछे चल रहे हैं. सारण से लालू प्रसाद यादव आगे चल रहे हैं. लेकिन पाटलिपुत्र में वे पीछे चल रहे हैं.

कुछ राज्यों जैसे दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजे हमारी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष

कुछ राज्यों जैसे दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजे हमारी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे

बिहार के सासाराम से कांग्रेस की मीरा कुमार आगे चल रही हैं.

बिहार में तीन सीटों पर परिणाम तय हो गए हैं- मधेपुरा से जनता दल-यू के शरद यादव, सुपौल से जनता दल-यू के विश्वमोहन और पूर्णिया से भाजपा के उदय सिंह की जीत तय हो गई है.

केरल के तिरुअनंतपुरम से कांग्रेस के उम्मीदवार शशि थरूर जीत गए हैं. दिल्ली की सभी सातों सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार आगे हैं.

उत्तर प्रदेश का मुक़ाबला

बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी के अनुसार उत्तर प्रदेश से 80 सीटों के रुझानों में बहुजन समाज पार्टी 21 सीटों पर, समाजवादी पार्टी 24, कांग्रेस 20, भाजपा 11 और आरएलडी 3 सीटों पर आगे चल रही है.

उत्तर प्रदेश के वाराणसी से भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी आगे हो गए हैं.

लखनऊ से भाजपा उम्मीदवार लालजी टंडन, रायबरेली से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, अमेठी से राहुल गांधी, मैनपुरी से समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह, गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ, एटा से कल्याण सिंह, गोंडा से बेनीप्रसाद वर्मा और ग़ाजियाबाद से भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह आगे चल रहे हैं.

मध्य प्रदेश में कड़ा संघर्ष

बीबीसी संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली के अनुसार मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में कड़ा मुक़ाबला है.

मनमोहन सिंह और लालकृष्ण आडवाणी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे

अब तक मिले रुझानों के अनुसार भाजपा 14 और कांग्रेस 13 सीटों पर आगे है. मध्यप्रदेश के विदिशा से सुषमा स्वराज और गुना से कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया आगे चल रहे हैं.

मध्यप्रदेश की रीवा और सतना सीटों पर बहुजन समाज पार्टी आगे चल रही है.

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस आगे

बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है कि पश्चिम बंगाल में वाममोर्चे को गहरा धक्का लगा है, वहाँ कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस गठबंधन आगे चल रहा है.

कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस 22 सीटों पर आगे चल रहे हैं, वाममोर्चे 12 सीटों पर और भाजपा एक सीट एक सीट पर आगे चल रही है.

नई संसद का गठन दो जून तक हो जाना है. वर्ष 2004 के चुनाव में कांग्रेस को 145 तो भाजपा को 138 सीटें मिली थीं.

पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग सीट से भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह आगे चल रहे हैं.

वामपंथी विपक्ष में बैठेंगे

सीपीएम महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि चुनाव परिणाम पार्टी के लिए बड़ा धक्का हैं.

वाममोर्चा विपक्ष में बैठेगा. बिना वजह हम क्यों कांग्रेस के साथ चिपके रहेंगे एबी बर्धन, सीपीआई महासचिव

वाममोर्चा विपक्ष में बैठेगा. बिना वजह हम क्यों कांग्रेस के साथ चिपके रहेंगे

उनका कहना था कि पार्टी के ख़राब प्रदर्शन की गंभीर समीक्षा किए जाने की ज़रूरत है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वामपंथी विपक्ष में बैठेंगे.

उन्होंने बताया कि सीपीएम ने 18 मई को समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की है.

दूसरी ओर सीपीआई नेता एबी बर्धन का कहना है, '' वाममोर्चा विपक्ष में बैठेगा. बिना वजह हम क्यों कांग्रेस के साथ चिपके रहेंगे.''

बर्धन का कहना था कि पार्टी जनता के प्रश्नों को उठाएगी और नतीजों की समीक्षा के लिए उसने 19,20 और 21 मई को बैठक बुलाई है.

तीसरे मोर्चे के नेताओं ने भी चुनाव परिणामों के बाद बैठक बुलाई है.

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