स्कूल छोड़ने वाले पवन चामलिंग चौथी बार मु़ख्यमंत्री बनेंगे

मुख्यमंत्री के रूप में चामलिंग का यह चौथा कार्यकाल होगा। चामलिंग का लक्ष्य अपने राज्य के लोगों को देश की मुख्य धारा के साथ जोड़ना है।

नर बहादुर भंडारी के 15 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने का रिकार्ड तोड़ने वाले चामलिंग की पार्टी ने इस वर्ष राज्य की एकमात्र लोकसभा सीट और सभी 32 विधानसभा सीटें जीत ली है। मुख्यमंत्री चामलिंग दक्षिण सिक्किम की पोकलोक-कामरंग व नामची-सिंघिथांग, दोनों विधानसभा सीटों पर चुनाव जीत गए हैं।

दक्षिण सिक्किम के दूरवर्ती यांगांग गांव में बहादुर राय और माया राय के घर वर्ष 1956 में पैदा हुए चामलिंग को पांचवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देनी पड़ी थी।

लेकिन चामलिंग को वर्ष 2005 में मणिपाल विश्वविद्यालय ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की। तब चामलिंग ने कहा था, "कोई भी व्यक्ति अपने अनुभवों से सीखता है और समय हर किसी को सिखा देता है।"

चामलिंग ने वर्ष 1973 में राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1985 में वह पहली बार दक्षिण सिक्किम के दामथांग सीट से विधानसभा के लिए चुने गए।

वर्ष 1989 के विधानसभा चुनाव बाद चामलिंग नर बहादुर भंडारी के मंत्रिमंडल में मंत्री बने और वर्ष 1993 तक उनकी पार्टी सिक्किम संग्राम परिषद (एसएसपी) में बने रहे।

चामलिंग ने 4 मार्च 1993 में अपनी खुद की पार्टी एसडीएफ की स्थापना की। पार्टी की स्थापना के अगले ही वर्ष हुए चुनाव में एसडीएफ ने जीत दर्ज कराई और चामलिंग राज्य के मुख्यमंत्री बने।

चामलिंग ने चुनाव पूर्व अपने अंतिम बयान में कहा था, "जनता ने मुझे पद पर बने रहने का मौका प्रदान किया है और जनता ही मेरा भाग्य तय करेगी। यदि जनता यह सोचती है कि सिक्किम के लिए कोई दूसरा व्यक्ति ज्यादा अच्छा काम कर सकता है तो वह मुझे बेशक छुट्टी दे सकती है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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