मध्य प्रदेश में नहीं चला शिवराज का जादू

भोपाल, 16 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव की तरह इस बार लोकसभा के चुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जादू नहीं चल पाया है। प्रदेश की 29 संसदीय सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की झोली में सिर्फ 16 सीटें ही आ पाई हैं। इतना ही नहीं पार्टी के कई दिग्गजों को चुनावी समर में हार का मुंह भी देखना पड़ा है।

पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले कांग्रेस ने इस बार राज्य में शानदार प्रदर्शन करते हुए दहाई का आंकड़ा पार करने में सफलता प्राप्त की।

लोकसभा के इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने एड़ी चोटी का जोर लगाया था। दोनों ही दलों ने टिकट वितरण से लेकर चुनाव प्रबंधन के मामले में एक दूसरे को शिकस्त देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शुरुआत में विदिशा संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार राजकुमार पटेल का पर्चा निरस्त होने के बाद कांग्रेस पिछड़ती नजर आ रही थी, मगर उसने चुनाव का अंतिम चरण आते-आते तक अपनी स्थिति को सुधार लिया।

इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को जहां नौ सीटों का नुकसान हुआ है वहीं कांग्रेस पिछले चुनाव के मुकाबले चार के अंक से उछाल मारकर 12 पर पहुंच गई है। रीवा संसदीय क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) जीत के करीब है। इस चुनाव में भाजपा जहां बिखरी नजर आई वहीं कांग्रेस ने एकजुटता से चुनाव लड़ने की कोशिश की और उसी के चलते परिणामों ने उसके पक्ष में तस्वीर बदल दी।

भाजपा ने यह चुनाव 25 सीटों को जीतने का लक्ष्य बनाकर लड़ा था मगर उसके यह इरादे पूरे नहीं हो पाए हैं। वह सिर्फ 16 सीटों पर ही कब्जा जमाने में कामयाब हो सकी है।

पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज विदिशा से, मुरैना से प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, भिन्ड से अशोक अर्गल, ग्वालियर से यशोधरा राजे सिंधिया, सागर से भूपेन्द्र सिंह, टीकमगढ से वीरेन्द्र खटीक, दमोह से शिवराज भैया, खजुराहो से जितेन्द्र सिंह बुन्देला, सतना से गणेश सिंह, सीधी से गोविन्द मिश्र, जबलपुर से राकेश सिंह, बालाघाट से क़े डी़ देशमुख, भोपाल से कैलाश जोशी, इन्दौर से सुमित्रा महाजन, खरगौन से माखन सिंह सोलंकी और बैतूल से ज्योति धर्वे चुनाव जीतने में सफल रही हैं।

भाजपा के दिग्गजों में शुमार मंडला से फग्गन सिंह कुलस्ते, राजगढ़ से लक्ष्मण सिंह, देवास से थावर चंद गहलोत, उज्जैन से सत्यनारायण जटिया, मंदसौर से लक्ष्मीनारायण पान्डे और रतलाम से दिलीप सिंह भूरिया को हार का सामना करना पड़ा है। भाजपा के यह ऐसे कद्दावर नेता हैं जो पिछले कई बार से संसद में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के लगभग सभी दिग्गज चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं। छिन्दवाड़ा से केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ, रतलाम से कान्तिलाल भूरिया और गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बार फिर जीत दर्ज की है। युवा नेता के तौर पर मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन ने भाजपा के बुजुर्ग नेता लक्ष्मीनारायण पान्डे को हराने में सफलता हासिल की हैं।

इसके अलावा शहडोल से राजेश नंदनी, मंडला से बसोरी सिंह, होशंगाबाद से उदय प्रताप सिंह, राजगढ़ से नारायण सिंह, देवास से सज्जन वर्मा, उज्जैन से प्रेमचंद गुड्डू, धार से गजेन्द्रसिंह राजूखेड़ी, खंडवा से अरूण यादव बाजी मारने में कामयाब हुए हैं।

इस चुनाव में रीवा संसदीय क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के देशराज पटेल बढ़त बनाए हुए है। प्रदेश की सतना में बसपा के सुखलाल कुशवाहा ने भाजपा के गणेश सिंह को कड़ी टक्कर दी है वहीं विदिशा में समाजवादी पार्टी (सपा) दूसरे स्थान पर रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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