उत्तर प्रदेश में रंग लाई राहुल की मेहनत

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का प्रदर्शन ज्यों का त्यों रहा तो सबसे ज्यादा चौंकाने वाला प्रदर्शन कांग्रेस का रहा। कांग्रेस इस बार यहां अपनी पुरानी जमीन पाने में बहुत हद तक सफल रही।

कांग्रेस के इस शानदार प्रदर्शन का सेहरा पार्टी महासचिव राहुल गांधी के माथे पर बांधा जा रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने के बाद राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में खात्मे के कगार पर जा पहुंची कांग्रेस में जान फूंकने के लिए जीतोड़ मेहनत की थी, सही मायनों में यह उसी का नतीजा है।

80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को 21 मिली है जबकि कांग्रेस को 21 भाजपा को 10 और सपा को 23 सीटों से संतोष करना पड़ा। बसपा को महज एक सीट का फयादा हुआ है वहीं सपा 36 से 23 के आंकड़े पर पहुंच गई। भाजपा 10 सीटों पर ही सिमटकर रह गई।

कांग्रेस ने पिछले चुनाव के मुकाबले आश्चर्यजनक प्रदर्शन करते हुए चुनावों में शानदार सफलता प्राप्त की। पिछले चुनाव में कांग्रेस इस राज्य से सिर्फ नौ ही सीटें जीत सकी थी।

2004 के लोकसभा चुनाव में राहुल को अमेठी की जनता ने भारी मतों से जिताकर संसद तो भेजा, लेकिन उनकी कांग्रेस पार्टी को वोट नहीं दिए। नतीजा, प्रदेश की कुल 80 सीटों में से कांग्रेस को सिर्फ 9 सीट पर जीत हासिल हुई।

उसके बाद राहुल रायबरेली और अमेठी से बाहर निकलकर प्रदेशभर में मेहनत करते रहे और 2007 में राज्य के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बहुत सक्रियता से चुनाव प्रचार किया। फिर भी जनता का दिल नहीं पिघला और उसने बसपा प्रमुख मायावती को सौंप दी। इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 22 सीटें मिलीं।

इस दौरान विपक्षी दलों ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा था कि उनमें गांधी नाम के अलावा और कोई खासियत नहीं है और वह उत्तर प्रदेश में कुछ नहीं कर सकते।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने आईएएनएस को बताया कि विरोधियों की तीखी आलोचना के बावजूद राहुल चुपचाप लगे रहे और सिर्फ चुनाव के समय ही नहीं बल्कि उसके बाद भी उत्तर प्रदेश और बाकी देश में आम जनता के साथ घुलते मिलते रहे।

इस दौरान राहुल कभी किसी दलित के बच्चे को कंधे पर बिठाकर घुमाते दिखे तो कभी सड़क किनारे खड़े चाय पीते हुए। उत्तर प्रदेश में तो गरीबों और दलितों के यहां वह अक्सर खाना खाने या उनकी झोपड़ी में सोने पहुंच जाते थे।

इस दौरान मायावती ने उन पर कई बार निशाना साधते हुए उनके दलित प्रेम को एक ढकोसला करार देकर मजाक उड़ाया। लेकिन आम जनता धीरे-धीरे उनके नेक इरादों पर विश्वास करने लगी।

कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में आज जो सम्मान मिला है राहुल की मेहनत के दम पर पूरे 18 वर्ष बाद उसे हासिल हुआ है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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