्रपश्चिम बंगाल: ममता की आंधी में ढहा वामपंथियों का किला
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस मिलकर राज्य की 26 सीटें जीतने को ओर कदम बढ़ा चुकी है जबकि वाम दलों को 15 सीटों से ही संतोष करना पड़ सकता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह दार्जिलिंग से चुनाव जीत गए हैं। उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवार जिबेश सरकार को 2,53,291 मतों से हराया।
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में वामपंथी दलों को 35 सीटों पर सफलता मिली थी। कांग्रेस को छह और तृणमूल को एक ही सीट से संतोष करना पड़ा था।
उल्लेखनीय है कि पिछले 32 वर्षो से प्रदेश में वामपंथी शासन है। वर्ष 1977 से लेकर अब तक हुए चुनावों में वाम दलों का यह सबसे निराशाजनक प्रदर्शन है। वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में उसे 26 सीटें मिली थी।
नक्सल प्रभावित बांकुड़ा, पुरुलिया और पश्चिमी मिदनापुर में वामदल अपना गढ़ बचाने में सफल रहे। बर्दवान जिले में भी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा।
जन कद्दावर नेताओं की इस चुनाव में हार हुई है उनमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मोहम्मद सलीम, ज्योर्तिमय सिकदर, भाजपा के सत्यव्रत मुखर्जी और प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सुब्रत मुखर्जी प्रमुख हैं।
पिछले कुछ वर्षो से चर्चा में रहे नंदीग्राम और सिंगुर में तृणमूल कांग्रेस जीत की ओर है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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