स्वात से बड़ी संख्या में पलायन

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पिछली महीने में लगभग 10 लाख लोगों ने घर छोड़ पलायन किया, जबकि पिछले एक साल में पाकिस्तान के अंदर विस्थापित होने वालों की तादाद बढ़कर लगभग 13 लाख हो गई है.
ज़्यादातर लोग स्वात घाटी के मुख्य शहर मिंगोरा से पलायन कर रहे हैं. सेना ने कर्फ़्यू में आठ घंटों की ढील दे रखी थी, ताकि संघर्ष वाले क्षेत्र से आम लोग निकल सके.
फ़िलहाल स्वात ज़िले में कर्फ़्यू में ढील के बाद दोबारा अनिश्चितकालीन कर्फ़्यू लागू कर दिया गया है.
शुक्रवार को मिंगोरा की सड़क, बसों और ट्रकों से भरी पड़ी थीं और प्रत्येक गाड़ी खचाखच भरी दिखी. छतें भी लोगों से भरी-पड़ी थीं.
एक अनुमान के अनुसार 80 हज़ार लोग संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीऐआर) के कैंप में रह रहे हैं जो मरदान शहर के आसपास बनाए गए हैं. माना जा रहा है कि विस्थापितों के बनाए गए शिविरों में स्थिति गंभीर होती जा रही है.
शरणार्थियों का संकट
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने मौजूदा स्थिति को वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद सबसे बड़ा शरणार्थी संकट बताया है.
उनका कहना था कि 'पाकिस्तान अपने इतिहास के चौराहे पर खड़ा है'. हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि 'स्वात में सैन्य कार्रवाई स्थाई हल नहीं है'.
दूसरी ओर सूबा सरहद के मिलिटरी कमांडर जनरल तारिक़ ख़ान का कहना है कि पाकिस्तान के भविष्य को तय करने के लिए तालेबान समर्थकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई बहुत ही आवश्यक है.
उनका कहना है कि ये लड़ाई लगभग एक महीने तक चलेगी, लेकिन यह प्रक्रिया बाद के दिनों में भी जारी रहेगी.
ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों सरकार और तालेबान चरमपंथियों के बीच स्वात में शांति समझौता टूट गया था और इसके बाद से वहाँ लड़ाई जारी है.
लड़ाई छिड़ जाने के बाद सेना ने स्वात में पिछले कुछ दिनों से कर्फ़्यू लगा रखा है. बाज़ार और व्यवसायिक केंद्र बंद हैं, जिससे इलाक़े में खाने-पीने की चीज़ें सहित दवाईयों की भारी क़िल्लत है.
वहीं सेना ने तालेबान के ख़िलाफ़ अपना अभियान तेज़ कर रखा है. सेना ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में उसने 50 से अधिक तालेबान लड़ाकों को मार गिराया है.


Click it and Unblock the Notifications