'सेना का अभियान अंतिम चरण में'

सेना प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदया ने बीबीसी को बताया है कि ये कहना मुश्किल है कि युद्ध कब समाप्त होगा.
अंतरराष्ट्रीय जगत की ओर से संघर्षविराम की सभी अपीलें श्रीलंका सरकार ने खारिज कर दी हैं और कहा है कि संघर्ष क्षेत्र में फँसे सभी नागरिकों को दो दिन के अंदर निकाल लिया जाएगा.
विद्रोहियों की वेबसाइट पर लिखा गया है कि उनके नियंत्रण वाला सारा इलाक़ा धुँआ-धुँआ है. इस पूरे संकट के बारे में चर्चा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र नया दूत भेज रहा है. विजय नांबियार दोबारा श्रीलंका लौट रहे हैं.
वे एक महीने पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति से मिले थे लेकिन मानवीय आधार पर मदद पहुँचाने के लिए अपने दलों को युद्ध क्षेत्रों तक पहुँच दिलाने में वे विफल रहे थे.
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक श्रीलंकाई सेना का कहना है कि अब उसे केवल 1.8 किलोमीटर इलाक़े पर कब्ज़ा करना है.
रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार गुरुवार को तीन हज़ार से ज़्य़ादा नागरिक सुरक्षित इलाक़े तक पहुँचने में सफल रहे.
दोनों ही पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है.
खूनखराबा
उधर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख की प्रवक्ता नवी पिलई ने कहा है कि वे श्रीलंका में मारे गए नागरिकों की स्वतंत्र जाँच करवाए जाने की वकालत करती हैं.
उनका कहना था कि श्रीलंका में जो कुछ हुआ उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए. ब्रिटेन ने कहा है कि श्रीलंका सरकार पर युद्ध अपराधों के लिए जाँच हो सकती है.
सरकार पर आरोप है कि उसने नागरिकों के इलाक़ों पर गोलीबारी की जबकि विद्रोहियों पर आरोप है कि उन्होंने लोगों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया और जो लोग भागना चाहते थे उन्हें गोली मारी गई.दोनों पक्ष इन आरोपों से इनकार करते आए हैं.
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता ने कहा है कि अगले 24 से 48 घंटे काफ़ी अहम रहने वाले हैं. उनका कहना था, "हम महीनों से कह रहे हैं कि बड़े पैमाने पर खूनखराबा होगा. लेकिन वहाँ फँसे नागरिकों की स्थिति बदहाल है."
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का उन दो डॉक्टरों से संपर्क टूट गया है जो संघर्ष वाले क्षेत्र से हताहतों के बारे में जानकारी दे रहे थे.


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