'श्रीलंका में मानवीय त्रासदी जैसे हालात'

श्रीलंका में रेड क्रॉस का कहना है कि जिन इलाक़ों में सेना ने तमिल विद्रोहियों को घेर रखा है वहाँ मानवीय त्रासदी जैसे हालात हैं. एजेंसी के मुताबिक संघर्ष के कारण पूर्वोत्तर इलाक़े तक पिछले तीन दिन से राहत सामग्री ला रही नौका नहीं पहुँच पा रही.
श्रीलंका सरकार ने पहले कहा था कि करीब दो हज़ार नागरिक सुरक्षित स्थानों पर पहुँचे हैं.ऐसी ख़बरें भी आ रही हैं कि युद्ध क्षेत्र में आख़िरी अस्पताल से भी एजेंसी के कर्मचारी चले गए हैं.अपुष्ट ख़बरों के मुताबिक लगातार हो रही गोलीबारी के कारण कर्मचारी अस्पताल छोड़ कर चले गए.
इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव जनरल बान की मून के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ विजय नांबियार को श्रीलंका भेजा जा रहा है ताकि नागरिकों की सुरक्षा का मामला उठाया जा सके. इस बीच गुरुवार को ब्रिटेन ने कहा है कि युद्ध अपराधों की आशंका को देखते हुए श्रीलंका सरकार के ख़िलाफ़ जाँच हो सकती है.
अपील ठुकराई
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक युद्ध क्षेत्र में करीब पचास हज़ार नागरिक फँसे हुए हैं हालांकि सरकार इस संख्या को ग़लत बता रही है.तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान बंद करने की अन्य देशों की अपीलों को श्रीलंका ने ठुकरा दिया है. अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने श्रीलंकाई सेना से नागरिकों पर हमले बंद करने और तमिल विद्रोहियों से हथियार डालने की अपील की थी.
सरकार का कहना है कि इससे विद्रोहियों को पलटवार करने का मौका मिल जाएगा.रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति की प्रवक्ता ने बताया है, आश्वासन के बावजूद सुरक्षा नहीं दी गई है और इस कारण समुद्र के रास्ते आना वाली राहत सामग्री नहीं आ पा रही है.
पूर्वोत्तर श्रीलंका में सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच कई महीनों से घमासान चल रहा है.श्रीलंका के विदेश सचिव पलिथा कोहोना ने बीबीसी को बताया कि सुरक्षा परिषद के ग़ैर-बाध्यकारी बयान से उन्हें प्रोत्साहन मिला है जिसमें विद्रोहियों से संघर्ष क्षेत्र में फँसे लोगों को निकलने देने की अपील की गई है.


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