आरुषि की मौत अनसुलझी गुत्थी

Arushi Talwar
नोएडा। बहुचर्चित आरुषि तलवार हत्याकांड को एक साल पूरा हो गया लेकिन आज भी उसकी मौत की गुत्थी सुलझ नहीं पाई है। आज अगर वह जिंदा होती तो अपने सोलहवें बर्थ-डे की तैयारी कर रही होती।

नोएडा के जलवायु विहार में पिछले वर्ष 16 मई को 14 वर्षीय आरुषि तलवार और नौकर हेमराज की हत्या कर दी गई थी। आरुषि मामला आज भी एक ऐसी गुत्थी की तरह है जो सुलझ नहीं पाई। हालांकि आरुषि और हेमराज की हत्या के मामले में आरुषि के पिता राजेश तलवार की गिरफ्तारी हुई थी। 50 दिनों तक जेल में रहने के बाद दंत चिकित्सक राजेश रिहा हो गए थे।

इस मामले की पेचीदगी के लिए नोएडा में तलवार परिवार के पड़ोसी मीडिया और पुलिस को जिम्मेदार मानते हैं। आरुषि के पड़ोस में रहने वाले ज्यादातर लोग इस मामले पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं दिखते। परंतु कुछ लोग बोलते भी हैं तो मीडिया और पुलिस को कोसने से नहीं चूकते।

पेशे से इंजीनियर डी. पी. गोयल का कहना है, "इस मामले में सीबीआई पूरी तरह से असफल रही है।" गोयल इस मामले में मीडिया की भूमिका पर सवाल खड़े करते हैं। उनका कहना है, "मीडिया ने इस मामले को काफी बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया। एक बच्ची के सम्मान को धूमिल किया गया। मीडिया का यह काम नहीं है कि वह फैसला सुनाए। जांच पूरी होने के बाद ही मीडिया को अपनी भूमिका निभानी चाहिए थी।"

सीमा शर्मा नाम गृहिणी मीडिया को गलत नहीं मानतीं। उनका कहना है कि इस मामले में पूरी लापरवाही पुलिस की ओर से बरती गई। पुलिस ने बिना किसी निष्कर्ष के इस मामले को तूल देने का काम किया।

गौरतलब है कि इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुरू की तो राजेश के चिकित्सा सहायक कृष्णा और उसके दो साथियों राजकुमार और विजय मंडल को आरोपी बनाया। परंतु सीबीआई इनके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने में विफल रही है। नतीजा यह रहा किसी के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल नहीं हो सका।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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