युद्ध क्षेत्र में फंसे नागरिकों को बचाया जाएगा : राजपक्षे (लीड-1)
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक सरकारी आंकड़े में उस इलाके में 20,000 नागरिकों के फंसे होने की बात कही गई है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों का कहना है कि युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए नागरिकों की संख्या 50,000 से अधिक है।
सूचना विभाग के हवाले से बताया गया है कि राजपक्षे ने अपने जॉर्डन दौरे के दौरान वहां निवास कर रहे श्रीलंकाई नागरिकों के साथ गुरुवार की रात एक बातचीत के दौरान इस आशय की घोषणा की थी।
राष्ट्रपति का कहना है कि श्रीलंकाई सेना तमिल विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के अंतिम ठिकानों की ओर बढ़ चुकी है।
सरकारी सूत्रों ने कहा है कि एक अन्य संबंधित घटनाक्रम के तहत संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के मुख्य कार्यकारी विजय नांबियार युद्ध क्षेत्र में फंसे नागरिकों और राहत शिविरों में पड़े नागरिकों की स्थिति पर आगे की चर्चा के लिए श्रीलंका पहुंच गए हैं।
इसके पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने जॉर्डन में राजपक्षे से मुलाकात की थी और युद्ध क्षेत्र की ताजा स्थिति पर उनके साथ चर्चा की थी।
इस बीच खबर है कि हजारों नागरिक एक झील के पार स्थित सेना के नियंत्रण वाले इलाके की ओर बढ़ रहे हैं और सेना लिट्टे के नियंत्रण वाले अंतिम इलाकों में प्रवेश कर गई है।
मुलैतिवु जिले के तटीय इलाके में सेना के साथ अग्रिम पंक्ति में डटे सरकारी चैनल श्रीलंका रूपवाहिनी टेलीविजन के एक संवाददाता ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाके में भारी विस्फोट देखे जा सकते है। आसमान में बड़ी मात्रा में धुंआ उठ रहा है।
समाचार चैनल के अनुसार लिट्टे प्रमुख वेलुपिल्लेई प्रभाकरन और उसके सहयोगी पोट्टू अमन अभी भी युद्ध क्षेत्र में मौजूद हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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