आरुषि मामले पर अंधेरे में तीर चला रही है सीबीआई
नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। नोएडा के बहुचर्चित आरुषि हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में लगी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथ अभी तक कुछ ठोस सुराग नहीं लग सका है। यह बात दीगर है कि उसकी जांच को महीनों बीत चुके हैं।
सीबीआई के प्रवक्ता हर्ष बहल ने आईएएनएस से कहा, "हम अभी भी इस मामले की जांच कर रहे हैं। सीबीआई इस मामले की सभी पहलुओं की जांच करेगी और जल्द ही अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी।"
उन्होंने बताया, "हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार और पीड़ितों के मोबाइल फोन इस मामले में अहम थे। अगर ये बरामद हो गए होते तो कातिलों तक पहुंचना आसान हो जाता।"
नोएडा के जलवायु विहार में पिछले वर्ष 16 मई को 14 वर्षीय आरुषि तलवार और नौकर हेमराज की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आरुषि के पिता राजेश तलवार की गिरफ्तारी भी हुई थी। हालांकि 50 दिनों तक जेल में रहने के बाद दंत चिकित्सक राजेश रिहा हो गए थे।
इस मामले की जांच सीबीआई ने शुरू की तो राजेश के कंपाउंडर कृष्णा और उसके दो साथियों राजकुमार और विजय मंडल को आरोपी बनाया गया। परंतु सीबीआई इनके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने में विफल रही है। नतीजा यह रहा किसी के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल नहीं हो सका।
बाद में सीबीआई की ओर से कहा गया है कि उसने तीनों आरोपियों के खिलाफ ताजा साक्ष्य एकत्र कर लिए हैं। परंतु एजेंसी इस मामले पर भी चुप्पी साधे हुए है।
राजकुमार और मंडल के वकील नरेश यादव ने आईएएनएस से कहा, "सीबीआई मेरे मुवक्किलों को फंसा रही है। अगर उनके खिलाफ सबूत होते तो सीबीआई आरोप पत्र दाखिल करने में इतना समय बर्बाद न करती।"
कृष्णा के वकील एफ. सी. शर्मा कहते हैं, "सीबीआई अंधेरे में निशाना लगा रही है। उसे खुद नहीं मालूम कि आरुषि और हेमराज का हत्यारा कौन है। सीबीआई अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के नाम पर इन निर्दोष लोगों पर आरोप मढ़ रही है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications