आतंकवाद से निपटने के लिए भारत से भागीदारी बढ़ाना चाहता है अमेरिका (लीड-1)
वाशिंगटन, 15 मई (आईएएनएस)। भारत की जगह अल-कायदा ठिकानों को नष्ट करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बना रहे अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है आतंकवाद से निपटने के लिए उनका देश भारत के साथ सामरिक साझेदारी बढ़ाने के लिए इच्छुक है।
विदेश विभाग में दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के लिए ओबामा द्वारा मनोनीत ब्लेक सीनेट की विदेशी मामलों संबंधी समिति के सामने पुष्टि के लिए पेश हुए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से निपटने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भारत के साथ सामरिक साझेदारी की जरूरत है।
ब्लेक ने कहा कि समान हितों और मूल्यों की वजह से अमेरिका भारत के साथ सामरिक भागीदारी बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के अलावा आतंकवाद से निपटने, व्यापक संहार की क्षमता वाले हथियारों का प्रसार रोकने, वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने, जलवायु परिवर्तन से निपटने और विश्व व्यापार वार्ता को फिर से शुरू करने के मामले में भी हमारे हित समान हैं।
ब्लेक ने कहा, "भारत जीवंत लोकतंत्र और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश है और वह दक्षिण मध्य एशिया के लिए स्थायित्व तथा अवसर का वाहक साबित हो सकता है।"
उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी अर्थव्यवस्था में नए प्राण फूंकना चाहता है जबकि भारत निवेश के अहम अवसर मुहैया करा सकता है।
ब्लेक ने कहा कि वर्ष 2003 में भारत को अमेरिकी निर्यात पांच अरब डॉलर था जो 2008 में बढ़कर 19 अरब डॉलर हो गया। उन्होंने कहा कि मध्य वर्ग के प्रसार और इस वर्ष अनुमानित पांच प्रतिशत की विकास दर के बीच भारत क्षेत्रीय समृद्धि का केंद्र बन सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत में मध्य वर्ग का आकार अमेरिका कुछ आबादी जितना है और आने वाले 20 साल में इसके बढ़कर 58 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।
इससे पहले ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टॉफ के चैयरमेन एडमिरल माइक मुलेन ने भी कहा था कि अमेरिका सुरक्षा संबंधी समान चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के साथ सामरिक साझेदारी बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा था, "भारत एक महत्वपूर्ण सामरिक साझेदार के रूप में उभरकर सामने आया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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