पाक के साथ है ब्रिटेनः गॉर्डन ब्राउन

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने बीबीसी के उस सर्वेक्षण को ग़लत करार दिया है जिसमें कहा गया है कि तालेबान का प्रभाव बढ़ता जा रहा है. बातीचत में ब्राउन ने चरमपंथियों को परास्त करने में पाकिस्तानी सेना की कोशिशों की तारीफ़ की. राष्ट्रपति ज़रदारी को बीते हफ़्तों में अमरीका की तीखी आलोचना झेलनी पड़ी है.
अमरीकी नेता और सैनिक कमांडर पाकिस्तान पर चरमपंथियों से सीधा मुक़ाबला नहीं करने का आरोप मढ़ते रहे हैं. ऐसे में पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने अमरीका से रिश्ते सुधारने के लिए ब्रिटेन का रुख़ किया है. और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने ज़रदारी के साथ खड़ा होने का सबूत देकर कर उनकी अपेक्षाओं को कुछ हद तक पूरा भी किया.
बुधवार को ज़रदारी से बातचीत के बाद ब्राउन ने स्वात में सैनिक कार्रवाई के कारण पलायन करने को मजबूर लोगों की आपात सहायता के लिए पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने की घोषणा की. उल्लेखनीय है कि स्वात में अपने घरों से भागने के लिए विवश लाखों लोगों में से एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो अपनी बुरी हालत के लिए सरकार को दोष देते हैं.
साझा प्रयास
ब्राउन ने कहा कि आतंकवाद को परास्त करने के लिए ब्रिटेन और पाकिस्तान मिल कर काम करेंगे. ब्रिटेन और पाकिस्तान का मज़बूत रिश्ता दो स्पष्ट संदेश देता है. पहला ये कि हम एक-दूसरे की रक्षा के लिए मिल कर काम करेंगे. दूसरा संदेश हम पर हमले की कोशिश करने वाले आतंकवादियों के लिए है, कि हम आतंकवाद को हराने के लिए साथ चलेंगे गोर्डन ब्राउन
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ब्राउन ने कहा, "ब्रिटेन और पाकिस्तान का मज़बूत रिश्ता दो स्पष्ट संदेश देता है. पहला ये कि हम एक-दूसरे की रक्षा के लिए मिल कर काम करेंगे. दूसरा संदेश हम पर हमले की कोशिश करने वाले आतंकवादियों के लिए है, कि हम आतंकवाद को हराने के लिए साथ चलेंगे."
संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ज़रदारी ने कहा कि उन्हें पता था कि तालेबान और अन्य चरमपंथियों से लड़ाई में पाकिस्तान, ब्रिटेन से सहायता की अपेक्षा कर सकता है.
आतंकवाद को एक बड़ी चुनौती बताते हुए ज़रदारी ने कहा, "ये इक्कीसवीं सदी की चुनौती है. हमें इसे स्वीकार करना ही होगा. ये चुनौती जल्दी ख़त्म नहीं होने जा रही है. ये लंबे समय तक रहेगी. हमारी जीवन शैली पर ख़तरा बनी इस चुनौती का हम दोनों देश मिल कर सामना करेंगे."
प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने पाकिस्तान को लगभग सवा करोड़ पाउंड की अतिरिक्त सहायता राशि देने की घोषणा भले ही की हो, लेकिन अमरीका की तरह ही ब्रिटेन भी इस बात को लेकर चिंतित है कि पाकिस्तान की सरकार कमज़ोर है.
पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता को बढ़ा कर सिर्फ़ उम्मीद ही की जा सकती है कि वहाँ की सरकार चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के साथ-साथ विकास कार्यों में भी तेज़ी लाएगी. ताकि पाकिस्तान की जनता को लोकतंत्र, चरमपंथी विचारधारा से कहीं ज़्यादा आकर्षक लगने लगे.


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