गट पियुचार तालेबान का गढ़ कैसे बना?

गट पियुचार तालेबान का गढ़ कैसे बना?

लेकिन ये क्षेत्र तालेबान का मुख्य केंद्र कब और कैसे बना?

सूबा सरहद के ज़िले स्वात में तालेबान का मज़बूत मुख्यालय समझा जाने वाला पहाड़ी इलाक़ा गट पियुचार 80 के दशक से चरमपंथियों और आप्राधिक लोगों का ठिकाना रहा है.

मुख्यालय मिंगोरा के उत्तर में लगभग 35 से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ये इलाक़ा ख़ूबसूरत घाटी शोवर का भाग है जो कई छोटी-छोटी पहाड़ी श्रृंखला और घने जंगलों पर आधारित है.

तहसील मटा की सीमा से लगभग 15-20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गट पियुचार दो अलग अलग क्षेत्र हैं जो पहाड़ों के दामन में लगभग छह किलो मीटर में फैले हुए हैं. ये दोनों क्षेत्र यूनियन काउंसिल शोवर और यूनियन काउंसिल ग्वालेरी का भाग हैं. वहाँ बहुमत गूजर और सैयद ख़ानदानों की है जो इस क्षेत्र के प्रभावशाली लोग समझे जाते हैं.

शुरुआत 80 के दशक में

इस पहाड़ी इलाक़े में चरमपंथियों का आगमन 1980 के दशक में उस समय हुआ जब प्रतिबंधित संगठन ‘तहरीक-ए-निफ़ाज़-ए-शरियत-ए-मोहम्मदी’ (टीएनएसएम) के नेता मौलाना सूफ़ी मोहम्मद ने मालाकंड डीविज़न में शराई प्रणाली लागू करने के लिए सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की.

जब मौलाना सूफ़ी के समर्थकों ने 1994 में मालाकंड में सरकारी कर्मचारियों को बंधक बनाया तो सरकार ने टीएनएसएम के कार्यकर्ताओं के विरुद्ध कारवाई शुरू की थी. तब बीच आंदोलन के कई महत्वपूर्ण कमांडरों ने गिरफ़्तारी से बचने के लिए गट पियुचार के पहाड़ों में शरण ली थी.

उस ज़माने में उन पहाड़ी इलाक़ों के कई महत्वपूर्ण लोगों ने सूफ़ी मोहम्मद के समर्थन की घोषणा करके उनके आनदोलन में शामिल हो गए थे. उन्होंने उस समय शरण लेने वाले टीएनएसएम के कार्यकर्ताओं की हर प्रकार से मदद की थी.

ये इलाक़ा आपराधिक लोगों का भी ठिकाना रहा है लेकिन तालेबान के आने के बाद वो लोग बाहर चले गए

स्वात में 2008 में जब सुरक्षाबलों की ओर से मौलाना फ़ज़लुल्लाह के समर्थक चरमपंथियों के विरुद्ध कारवाई में तेज़ी आई तो तालेबान के सारे महत्वपूर्ण नेता और कमांडर मटा, कबल, ख़्वाज़ा ख़ीला छोड़ कर गट पियुचार की ओर आ गए. उसके बाद तालेबान ने यहां पर अपना मुख्यालय बना लिया था.

आपराधिक ठिकाना

कुछ सरकारी सूत्रों का कहना है कि तालेबान ने गट पियुचार में कई केंद्रों की भी स्थापना कर रखी है जहां वह नए भर्ती होने वाले लोगों को प्रशिक्षण देते हैं. बताया जाता है कि उस इलाक़े से स्वात में तालेबान की सारी गतिविधियों और कारवाईयों को संचालित और कंट्रोल किया जाता था. पहाड़ी और सुदूर इलाक़ा होने की वजह से ये घाटी तालेबान के लिए एक सुरक्षित स्थान के तौर पर काम करती रही.

इसके अलावा ये इलाक़ा डाकुओं और अन्य आपराधिक पेशा लोगों का भी ठिकाना रहा है. बताया जाता है कि स्वात में हत्या, बैंक डकैती, चोरी, और अन्य अपराधों में शामिल ज़्यादातर व्यक्ति गट पियुचार भाग कर पनाह लेते थे.

तालेबान के आने के बाद आपराधिक गतिविधियों वाले लोग ये इलाक़ा छोड़ कर दूसरी जगह चले गए.

गट पियुचार घने जंगलों में है और वहां का मौसम गर्मियों में अत्यधिक सुहाना होता है. उसकी सीमाएं देर के इलाक़े निहाग दर्रे से मिलती हैं, ये इलाक़ा हमेशा से ही पुलिस की पहुँच से बाहर का क्षेत्र रहा है. तालेबान के आने से यहां पर उनका पूरी तरह से क़ब्ज़ा हो गया है.

तालेबान के प्रवक्ता हाजी मुस्लिम ख़ान ने बीबीसी से बात करते हुए गट पियुचार का इलाक़ा ख़ाली करने की तो पुष्टि नहीं की लेकिन उन्होंने कहा कि बमबारी के भय से पहले ही लोग उस इलाक़े को ख़ाली कर के जा चुके हैं.

उन्होंने कहा कि पियुचार में कोई लड़ाई नहीं हो रही है बल्कि असली युद्ध तो मांट्रीसर कबल तहसील में जारी है जहां दोनों तरफ़ के लोग आमने-सामने की लड़ाई में शामिल हैं. मुस्लिम ख़ान की बातों से लग रहा था कि अब तालेबान अपना मुख्यालय छोड़ कर दूसरी जगह चले गए हैं.

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