'हज़ारों लोग संघर्षग्रस्त क्षेत्र से भाग निकले'

श्रीलंकाई सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय ननयक्करा ने बताया कि वे आम लोग विद्रोहियों की गोलीबारी का सामना करते हुए भी वो दलदल पार करके सरकार के नियंत्रण वाले हिस्सों में पहुँचे.
प्रवक्ता के अनुसार अभी दो हज़ार अन्य लोग सरकार के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में पहुँचने की आस लगाए हैं.
ब्रिगेडियर ननयक्करा के अनुसार एक मानवरहित विमान ने उस क्षेत्र के दृश्य फ़िल्माए हैं और चार आम लोग उस समय मारे गए जब तमिल टाइगर विद्रोहियों ने भागने की कोशिश कर रहे लोगों पर गोलियाँ चलाईं.
घटनाक्रम पर श्रीलंका सेना के इस ब्यौरे की किसी स्वतंत्र सूत्र से पुष्टि नहीं हो सकती है और विद्रोहियों की ओर से इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है.
एक अन्य अपुष्ट ख़बर के अनुसार विद्रोहियों के नियंत्रण वाले क्षेत्र के मुख्य अस्पताल से चिकित्साकर्मी चले गए हैं. बताया जा रहा है कि ऐसा वहाँ लगातार हो रही गोलीबारी की वजह से हुआ.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग 50 हज़ार आम लोग अब भी संघर्ष वाले इलाक़ों में फँसे हैं.
'कार्रवाई जारी रहेगी'
सेना की कार्रवाई पूरी तरह से रोक देने से एलटीटीई को दोबारा ताक़त प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और इस लड़ाई को अगले 25 साल तक जारी रखनी होगी श्रीलंका के विदेश सचिव पलिथा कोहोना
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इस बीच श्रीलंका सरकार ने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की अपील ठुकारते हुए तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई रोकने से इनकार कर दिया है.
ग़ौरतलब है कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वॉशिंगटन में कहा था कि श्रीलंका की सरकार निर्दोष नागरिकों पर बमबारी बंद करे और संयुक्त राष्ट्र की राहत टीमों को संघर्ष वाले इलाक़े में जाने की इजाज़त दे.
ओबामा का कहना था, "तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के लड़ाकों को हथियार डाल देने चाहिए और आम नागरिकों को ढाल के रूप में इस्तेमाल करना बंद करना चाहिए."
इस पर श्रीलंका के विदेश सचिव पलिथा कोहोना ने अमरीका का बिना नाम लिए कहा, "सेना की कार्रवाई पूरी तरह से रोक देने से एलटीटीई को दोबारा ताक़त प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और इस लड़ाई को अगले 25 साल तक जारी रखना होगा."
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य पूर्वोत्तर श्रीलंका में गहराते मानवीय संकट पर अपनी चिंता ज़ाहिर करते हैं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद
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सुरक्षा परिषद
उधर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों से संघर्ष क्षेत्र में फँसे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही पूर्वोत्तर श्रीलंका में 'गहराते मानवीय संकट' पर 'गंभीर चिंता' ज़ाहिर की थी.
सुरक्षा परिषद ने बयान में कहा था, "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य पूर्वोत्तर श्रीलंका में गहराते मानवीय संकट पर अपनी चिंता ज़ाहिर करते हैं और पिछले दिनों सैकड़ों नागरिकों के हताहत होने की ख़बरों से चिंतित हैं."
परिषद ने बयान में एलटीटीआई की वर्षों चली चरमपंथी गतिविधियों की भी निंदा की थी और विद्रोहियों से अपील की थी कि वे हथियार त्याग दें और हज़ारों की तादाद में फँसे आम नागरिकों को संघर्ष क्षेत्र से बाहर निकलने दें.
संयुक्त राष्ट्र ने सेना की ओर से जारी भारी गोलाबारी की भी निंदा की थी.


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