नए सहयोगियों को साधने में जुटे राजनीतिक दल (राउंडअप)
इसी के मद्देनजर सरकार बनाने के प्रमुख दावेदार गठबंधनों संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग), राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और तीसरे मोर्चे के आला नेताओं और रणनीतिकारों ने एक तरफ बैठकें करनी आरंभ कर दी हैं वहीं दूसरी ओर अपने-अपने घोड़े भी मैदान में दौड़ा दिए हैं।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी इसी सिलसिले में आज दिल्ली पहुंचे। पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर भाजपा के कोर ग्रुप के नेताओं की एक बैठक हुई जिसमें छोटे-छोटे राजनीतिक दलों को राजग से जोड़ने को लेकर चर्चा हुई।
मोदी ने संवाददाताओं से बातचीत में यह स्पष्ट भी किया। उन्होंने कहा, "राजनीतिक कारणों से मैं दिल्ली में हूं। चुनाव बाद की परिस्थिति के बारे में वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा होगी। इसमें कुछ भी छुपाने वाली बात नहीं है।"
भाजपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने मोदी को ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की अध्यक्ष जे. जयललिता को साधने का जिम्मा दिया गया है। ज्ञात हो कि गुजरात विधानसभा के पिछले चुनाव में मोदी को मिली सफलता के बाद जयललिता ने न उन्हें सिर्फ फोन कर बधाई दी थी बल्कि उन्हें चेन्नई आमंत्रित भी किया था।
भाजपा ने गुरुवार को दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ही देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे।
भाजपा प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में शनिवार को होने वाली मतगणना का हवाला देते हुए कहा, "16 मई के बाद आडवाणी भारत के प्रधानमंत्री होंगे।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि 545 सदस्यीय लोकसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी और उसके नेतृत्व वाला राजग सबसे बड़ा चुनाव-पूर्व गठबंधन बनेगा।
पार्टी के नेता जयललिता के अलावा पट्टाली मक्कल काची (पीएमके), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और बीजू जनता दल (बीजद) को भी साथ लाने के प्रयासों में जुट गए हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इन दलों के राजग में लाने की कोशिशों से इंकार नहीं किया।
उधर, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर भी आज शाम पार्टी रणनीतिकारों की एक बैठक हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह और जनार्दन द्विवेदी, केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री कमलनाथ, विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी, रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने हिस्सा लिया।
इस बीच, सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से फोन पर बातचीत कर चुनाव के दौरान बड़ी तल्खियों को कम करने का प्रयास किया। सोनिया ने इसी प्रयास के तहत बुधवार को लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान को भी फोन किया था।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने आज सोनिया गांधी को फोन कर यह जताने का प्रयास किया कि वे हर हाल में संप्रग के साथ हैं।
कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ रिश्तों में आई कड़वाहट को भी गुरुवार को कम करने का प्रयास किया। सपा को साधने का कांग्रेस का प्रयास सफल हो गया भी लगता है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह द्वारा फोन कर सपा महासचिव अमर सिंह से माफी मांगने के बाद अमर सिंह ने कहा कि उन्होंने दिग्विजय को माफ कर दिया।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "चुनाव सर्वेक्षणों को कांग्रेस गलत साबित कर देगी। सर्वेक्षणों के अनुमान से अधिक सीटें हम जीतेंगे।"
उन्होंने कहा, "हम मीडिया संस्थानों के अनुमानों को फिर से गलत साबित कर दिखाएंगे। हमें कितनी सीटें मिल रही है, इस बारे में हम कोई अनुमान नहीं लगाएंगे लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि हम एक स्थायी सरकार बनाएंगे।"
अमर सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "दिग्विजय सिंह ने मुझे आज दोपहर फोन किया और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि चुनाव के चलते मैंने आपको बुरा भला कहा, इसके लिए मैं माफी मांगता हूं। वह मेरे बड़े भाई जैसे हैं इसलिए मैं उन्हें माफ करता हूं।"
अमर सिंह ने कहा, "दिग्विजय सिंह ने मुझ पर कोई निजी आक्षेप नहीं लगाया था। उन्होंने जो बयान दिए थे वे राजनीतिक थे।"
उधर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात ने आज एक बार फिर स्पष्ट किया कि वाम दल किसी भी सूरत में कांग्रेस का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में नहीं आएगी और हम ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं करेंगे कि जिससे भाजपा को फायदा हो।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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