मध्य प्रदेश में वामपंथी आंदोलन के झंडाबरदार होमी दाजी नहीं रहे (लीड-1)
प्राप्त जानकारी के अनुसार दो मई को होमी दाजी को निमोनिया और फेफड़ों में संक्रमण होने के कारण चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। उनके पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि दाजी को मधुमेह सहित कई बीमारियां थीं और उनका कई वषों से उपचार चल रहा था। उनके परिवार में अब उनकी पत्नी पेरिन दाजी ही हैं। उनका एक बेटा और एक बेटी भी थीं, लेकिन दोनों की ही अकाल मृत्यु हो चुकी है, बेटे की दिल का दौरा पड़ने से और बेटी की कैंसर से।
यह होमी दाजी के राजनीतिक कद और सिद्धांत-निष्ठा का ही असर था कि मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने राजनीतिक सौजन्यता के तकाजे के अनुरूप उनके इलाज के लिए एक लाख रुपये की सहायता दी थी।
दाजी का जन्म 5 सितम्बर 1923 को एक मध्यमवर्गीय पारसी परिवार में हुआ था। वर्ष 1946 में उन्होंने ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के माध्यम से सक्रिय राजनीति अपने कदम रखे और कुछ ही वर्षो बाद उन्होंने इंदौर-उज्जैन के कपड़ा मिल मजदूरों के बीच काम करना शुरू कर दिया।
होमी दाजी यद्यपि मजदूर नेता थे, लेकिन समाज के अन्य तबकों में भी वह कम लोकप्रिय नहीं थे। यही वजह थी कि वह इंदौर से दो बार विधायक और एक बार सांसद रहे। उन्होंने मध्य प्रदेश की दूसरी विधानसभा का चुनाव पूर्वी इंदौर से और पांचवीं विधानसभा का चुनाव इंदौर-2 से भाकपा के प्रत्याशी के रूप में जीता था।
वर्ष 1962 में उन्होंने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार लोकसभा का चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीत दर्ज की। तीसरी लोकसभा में वे उन चुनिंदा सदस्यों में से थे, जिनके संसदीय कौशल और भाषण शैली से तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और समाजवादी नेता डॉ. राममनोहर लोहिया भी प्रशंसक थे।
अपने लंबे राजनीतिक सफर में दाजी वर्ष 1965 से 1985 तक भाकपा की मध्य प्रदेश इकाई के सचिव रहे। । वर्ष 1990 से 1996 के बीच वह भाकपा के राष्ट्रीय सचिव और ऑल इंडिया ट्रेड युनियन कांग्रेस (एटक) के महासचिव भी रहे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications