बालाघाट में नक्सलियों की फिर बढ़ी हरकत

नक्सलियों के प्रभाव क्षेत्र वाले बालाघाट में पिछले कुछ वर्षो से शांत पड़े मलाजखंड और टाडा दलम के सदस्य एक बार फिर सक्रिय हो चले हैं। इन संगठनों से जुड़े वे लोग हैं जिन्होंने दिसम्बर 1999 में तत्कालीन परिवहन मंत्री लिखीराम कांवरे की नृशंस हत्या की थी। इनकी सक्रियता का खुलासा लोकसभा चुनाव के दौरान हुआ था जब उन्होंने चुनाव बहिष्कार का एलान किया था।

बालाघाट जिले में 22 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के मतदान से एक दिन पहले देवरबेली पुलिस चौकी क्षेत्र में हर्रा डेही गांव में बारूदी सुरंग मिली थी। यह सुरंग नक्सलियों द्वारा बिछाई गई थी और वे चुनाव के दौरान बड़ी वारदात को अंजाम देना चाहते थे। मगर उनके मंसूबे कामयाब नहीं हो पाए थे।

बालाघाट के पुलिस अधीक्षक हरिनारायण चारीमिश्रा ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि नक्सली सक्रिय हैं और वे बड़ी वारदात को अंजाम देना चाहते हैं, परंतु पुलिस की सक्रियता के चलते वे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार की रात को नक्सली किसी बड़ी वारदात की तैयारी में थे, मगर पुलिस ने उसे नाकाम कर दिया। पुलिस द्वारा घेराबंदी किए जाने से नक्सली बोरबन के जंगल में 15 हेंड ग्रेनेड, दो क्लोमोर माइन की प्लेट और एक बंदूक छोड़कर भाग खड़े हुए।

चारीमिश्रा ने बताया कि नक्सलियों के जो हेंड ग्रेनेड मिले हैं वे काफी शक्तिशाली हैं। पुलिस ने मलाजखंड और टाडा दलम के नक्सलियों को पकड़ने के लिए सघन अभियान छेड़ रखा है। वहीं पुलिस लिखीराम कांवरे की हत्या में शामिल नक्सलियों को भी पकड़ने में जुट गई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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