मुद्रास्फीति की दर गिरकर 0.48 फीसदी हुई (लीड-1)
मुद्रास्फीति की दर उद्योग एवं एवं वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित होती है।
दो मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान तीन प्रमुख कमोडिटी समूहों में से विनिर्मित वस्तुओं और प्राथमिक वस्तुओं के सूचकांक में 0.4 फीसदी की तेजी आई।
ईंधन, ऊर्जा, बिजली और स्नेहकों के सूचकांक में 0.2 फीसदी का इजाफा हुआ और यह 323 (अस्थाई) से बढ़कर 323.7 (अस्थाई) पर पहुंच गया। यह इजाफा मुख्यत: फर्नेस ऑयल, नेप्था ऑयल और लाइट डीजल की कीमतों में तेजी की वजह से हुआ।
26 अप्रैल से दो मई के दरमियान थोक मूल्य सूचकांक 0.4 फीसदी बढ़कर 230.7 (अस्थाई) से बढ़कर 231.6 (अस्थाई) हो गया।
दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के वाणिज्य विभाग के प्रमुख श्रीराम खन्ना ने कहा, "मुद्रास्फीति के आंकड़ों में कमी के बावजूद कुल मिलाकर आर्थिक परिदृश्य ठीकठाक है।"
खन्ना ने कहा, "इस वर्ष गेहूं की जबरदस्त पैदावार हुई है। पता चला है कि भंडारों में उसे रखने के लिए जगह ही नहीं है। ये सब सुधार के संकेत हैं।"
नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईअोर) में परियोजना प्रभारी दलीप कुमार ने कहा कि थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति में कमी आई है लेकिन खुदरा कीमतें बढ़नी जारी हैं। इसीलिए उपभोक्ताओं को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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