श्रीलंका के तमिल-सिंहली संघर्ष की गूंज कनाडा में भी
तमिलों की यह अब तक की सबसे बड़ी रैली थी। ओंटारियों के प्रधानमंत्री डाल्टन मैकगुंटी ने रविवार रात को देश के सबसे बड़े राजमार्ग 'गार्डिनर एक्सप्रेस' पर जाम लगा रहे तमिलों से ऐसा करने के बजाए विधानसभा के सामने अपनी रैलियां करने के लिए आमंत्रित किया था।
हेलीकाप्टर में लगे बैनर को पहले देखकर तो तमिल प्रदर्शनकारी भ्रमित हुए लेकिन एक बार उसे स्पष्ट रूप से पढ़ने के बाद उनका गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने पुलिस के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया।
बाद में पता चला कि यह बैनर टोरंटो के सिंहली समुदाय का था,जिसने पहली बार तमिल विरोधी प्रदर्शन किया। सिंहलियों ने तमिल विद्रोहियों के विरोध वाली तख्तियों के साथ डॉन वैली पार्क में प्रदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि सिंहली समुदाय के 50,000 सदस्य अभी तक शांत हैं लेकिन उनको भय है कि यदि तमिलों को लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) की हिंसा को यहां आयात करने की अनुमति दी गई तो कनाडा सुरक्षित स्थान नहीं रह जाएगा।
सिंहली प्रदर्शनकारियों के नेता कुमार गुनशेखरा ने स्थानीय दैनिक 'टोरंटो' स्टार से कहा,"हम चाहते हैं कि टोरंटो सुरक्षित रहे। कनाडा के तमिल समुदाय को तमिल विद्रोही नियंत्रित कर रहे हैं और केवल उन्हीं की बात सुनी जा रही है। हमें लगता है कि हम पर नियंत्रण लगाया जा रहा है।"
उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता टोरंटो में रह रहे करीब 1000 लिट्टे कार्यकर्ता हैं जो यहां हिंसा फैला सकते
हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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