छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई हार रहा है?

सुजीत कुमार

रायपुर, 13 मई (आईएएनएस)। इस महीने छत्तीसगढ़ में नक्सलवादियों ने 30 से अधिक लोगों की हत्या कर दी और इनमें से अधिकांश सुरक्षाकर्मी थे। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस नक्सलवाद विरोधी मुहिम में कुछ मूल बिंदुओं की अनदेखी कर नक्सलियों के जाल में फंस रही है।

रविवार को राज्य के धमतारी जिले में 12 पुलिसकर्मियों और एक बस चालक की हत्या ने पुलिस प्रशासन को झकझोर दिया है। इस घटना के 16 घंटों बाद भी पुलिस मुख्यालय को यह मालूम नहीं था कि आखिर हुआ क्या है। सोमवार दोपहर तक ही पुलिस इसकी पुष्टि कर सकी कि हमले में मारे गए लोगों में से 12 सुरक्षाकर्मी और एक बस चालक शामिल थे।

कांकेर में काउंटर टेरोरिज्म एंड जंगल वारफेयर कालेज(सीटीजेडब्ल्यूसी) के ब्रिगेडियर (सेवानिवृत) बी.के पोनवर कहते हैं, "नक्सलवादियों को उनकी ही शैली में जवाब दिए जाने की जरूरत है। हम प्रशिक्षुओं को 48 बिंदुओं पर खास ध्यान देने को कहते रहे हैं। सबसे पहला सुझाव यह है कि जंगली मार्गो पर आतंकवादियों के खिलाफ मुहिम में वाहनों का इस्तेमाल कतई नहीं किया जाए। इससे सुरक्षाकर्मियों के सामूहिक तौर पर निशाना बनने का खतरा पैदा हो जाता है। गाड़ियों का इस्तेमाल राशन, गोला-बारूद ढोने में ही किया जाना चाहिए।"

कई विशेषज्ञ मानते हैं कि नक्सलवादियों से लंबे समय तक जूझने के बावजूद पुलिस की कोई ठोस रणनीति नहीं बन पाई है। बस्तर में वर्षो तक अपनी सेवा दे चुके एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, "लगता है हमारे पास कोई रणनीति नहीं है। पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन को चुनाव आयोग द्वारा छुट्टी पर जाने को बाध्य किए जाने के बाद पुलिस की रणनीति और बिगड़ गई है। मुझे लगता है कि नक्सलवाद के खिलाफ पुलिस का अभियान दम तोड़ रहा है और सुरक्षाकर्मी आसान निशाना बन गए हैं। ऊपरी स्तर पर अधिकारियों में कोई समन्वय नहीं है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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