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चीनी क्षमता से शिकस्त खा गया भारतीय लोकतंत्र

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लंदन, 13 मई (आईएएनएस)। ऐसे में जब बुधवार को करोड़ों भारतीय मतदाता अंतिम चरण के मतदान के तहत अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने में व्यस्त थे, हजारों किलोमीटर दूर लंदन में भी भारत एक चुनावी जंग लड़ रहा था, पर इसमें वह एकदलीय व्यवस्था वाले चीन से शिकस्त खा गया।

लंदन के रॉयल जियोग्राफिकल सोसायटी में भारत और चीन पर केंद्रित बहस के अंत में जो मतदान हुआ उसमें भारत को 160 मतों से चीन के हाथों शिकस्त खानी पड़ी। इससे भारत के प्रति सहानुभूति रखने वालों को मायूसी हाथ लगी।

बहस के शुरू में मतदाताओं में से 266 सदस्यों ने 'आने वाला कल भारत का है, चीन का नहीं' नामक प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। 223 सदस्यों ने इस प्रस्ताव के विरोध में वोट दिए जबकि 221 सदस्य तटस्थ रहे।

अंत में जब लोगों को फिर से मतदान करने को कहा गया तो तटस्थ सदस्यों की संख्या घटकर 23 हो गई और चीन के पक्ष में 421 मत दर्ज हुए, जबकि भारत के पक्ष में निर्णायक मत घटकर 261 रह गए।

इस बहस के संचालक द इकोनॉमिस्ट पत्रिका के इडवार्ड लुकास ने नजीते को चीन के पक्ष में तेज गोलंबदी की संज्ञा दी। इस मौके पर भारत के पक्ष में प्रोक्टर एंड गैंबल इंडिया के पूर्व सीईओ एवं लेखक गुरचरण दास, जाने-माने प्रसारक मार्क टली और अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त अर्थशास्त्री दीपक लाल ने अपनी राय रखी।

चीन की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर के विदेश नीति सलाहकार और निजी सचिव चार्ल्स पावेल, मलेशियाई मूल के अर्थशास्त्री डैनी कुआह और हांगकांग के व्यापारी डेविड तांग ने अपनी राय रखी।

यूं तो कई वक्ताओं ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र दुनिया के भविष्य के लिहाज से आदर्श है, पर पावेल ने इसे महज एक धारणा करार देते हुए चीन को अकूत संभावनाओं वाला देश करार दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य को लेकर चीन की जो रणनीति है वह दुनिया के लिए भी प्रेरक है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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