तालिबान हमारी ही देनः जरदारी

रविवार को एनबीसी के प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में जरदारी ने तालिबान के निर्माण के संबंध में पूछे जाने पर कहा कि आईएसआई और सीआईए ने मिलकर तालिबान को खड़ा किया और इसके लिए केवल पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं है।
अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ तालिबान के लड़ने का हवाला देते हुए जरदारी ने कहा कि वह अमेरिका की 10 किताबों, 10 लेखकों और 10 लेखों में इसके प्रमाण दिखा सकते हैं। यह पूछे जाने पर कि न्यूयार्क पर 9/11 के हमले के बाद मामला उलट गया और अमेरिका ने तालिबान के खतरे को समाप्त करने का निर्णय लिया जबकि पाकिस्तान दोनों पक्षों का साथ देता रहा तो जरदारी ने टोकते हुए कहा, "आप मुझे कह रहे हैं।
मुझे उसी तानाशाह ने कैद किया था जिसका आप समर्थन कर रहे थे।" उन्होंने कहा, "यह तथ्य है कि पूर्व राष्ट्रपति जरनल परवेज मुशर्रफ के कारण मैंने अपनी पत्नी को खोया और पांच वर्ष जेल में बिताए।"
जरदारी इस बात से सहमत नहीं थे कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया सेवा का रुख अभी भी तालिबान के प्रति सहानुभूतिपूर्ण है। जरदारी ने कहा कि यह मुशर्रफ की नीति थी कि खरगोश के साथ दौड़ना और कुत्ते के लिए शिकार करना। वह इस तरीके से नहीं सोचते।
यह पूछे जाने पर कि पाकिस्तान पर किसका नियंत्रण है, उनका या सेना का, जरदारी ने कहा, "मेरा मानना है कि सेना का नियंत्रण अपने अधिकार क्षेत्र में है और मेरा नियंत्रण पूरे देश पर है।"
जब यह पूछा गया कि क्या सेना उनके फैसले को पलट सकती है, जरदारी ने मजबूती से कहा, "नहीं, मैं उनके निर्णय को पलट सकता हूं।" पिछले दिनों सेना द्वारा उनके फैसलों को पलटने से इंकार करते हुए जरदारी ने कहा, "नहीं, हमने उनके नजरिए को अपनाया और उन्होंने हमारी स्थिति को समझा।"
यह पूछे जाने पर कि क्यों मुंबई पर आतंकवादी हमले के बाद आईएसआई प्रमुख को भारत भेजने के उनके फैसले को सेना ने उलट दिया, जरदारी ने कहा, "नहीं, सेना ने उनका निर्णय नहीं पलटा। वे सोचते थे कि ऐसा करने में बहुत जल्दबाजी की जा रही है और अंत में हमने खुफिया प्रमुखों की मुलाकात का प्रस्ताव दिया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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