'वामदलों को श्रेय देने को तैयार थे पीएम'

Manmohan Singh

भारतीय प्रधानमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार का कहना है कि मनमोहन सिंह परमाणु समझौते के अंतिम मसौदे का श्रेय वामदलों को देने को तैयार थे. पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारू ने बीबीसी से कहा कि ''प्रधानमंत्री देश हित'' में ऐसा कहने पर सहमत हो गए थे कि वामपंथियों ने बेहतर समझौते के लिए सरकार को बाध्य कर दिया था.

लेकिन उनका कहना है कि कठोर रुख़वाले वामपंथी नेताओं ने इस सहमति को ठुकरा दिया जिसके बाद वामपंथी दलों ने समर्थन वापसी की घोषणा कर दी थी. लेकिन मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कराट ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी भी प्रस्ताव की जानकारी नहीं है.

वो मीडिया को ये बताने नहीं देते थे कि सरकार के जिस फ़ैसले का श्रेय लोग ले रहे होते थे या फिर उन्हें दिया जा रहा होता था, वो निर्णय उनका था

प्रकाश कराट ने बीबीसी से कहा,'' कोई शख्स अपने आप कुछ कर रहा हो सकता है.'' ग़ौरतलब है कि प्रकाश कराट परमाणु समझौते के कट्टर विरोधी थे.

संजय बारू का कहना है कि 'प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आपसी सहमति से नीति बनाने में महारत हासिल है.' लेकिन उनका कहना था कि मीडिया सलाहकार के रूप में उनका काम कई मौक़ों पर कठिन हो जाता था क्योंकि मनमोहन सिंह अपने फ़ैसलों का श्रेय दूसरों को लेने दे देते थे.

'सहमति में निपुण'

संजय बारू ने कहा,'' वो मीडिया को ये बताने नहीं देते थे कि सरकार के जिस फ़ैसले का श्रेय लोग ले रहे होते थे या फिर उन्हें दिया जा रहा होता था, वो निर्णय उनका था.'' वो कहते हैं कि अमरीका के साथ असैन्य परमाणु समझौता ऐसी ही एक मिसाल था.

उनका कहना था कि एक वरिष्ठ वामपंथी नेता ने समझौता फ़ार्मूला रखा था जिससे संदेश ये जाता कि वामपंथी दलों के कारण अमरीका से प्रधानमंत्री की क्षमता से बेहतर नतीजे हासिल हो सके. संजय बारू का कहना था,'' मनमोहन सिंह समझौता के लिए झुकने को तैयार थे.'' लेकिन कट्टर रुख़वाले वामपंथियों ने इसे अस्वीकार कर दिया था.

उनका कहना था कि मनमोहन सिंह हमेशा धैर्यपूर्वक सलाह सुनने के बाद निर्णय लेते थे.संजय बारू का कहना था कि अप्रैल, 2005 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब भारत प्रशासित श्रीनगर से पाकिस्तान प्रशासित मुज़फ्फ़राबाद बस सेवा को झंडी दिखाने गए थे तो उस दौरान चरमपंथियों ने श्रीनगर पर्यटन केंद्र को निशाना बनाया था.

इसके बाद प्रधानमंत्री के सलाहकारों ने उन्हें अपनी यात्रा स्थगित करने को कहा था.बारू बताते हैं,'' प्रधानमंत्री थके और बेहद चिंतित नज़र आ रहे थे. टीवी पर हमले से तबाही की तस्वीरें दिखाई जा रही थीं.''कुछ देर की चुप्पी के बाद उन्होंने कहा,'' मैं जाऊंगा. उन्होंने अपने निजी सचिव से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से फो़न मिलाने का निर्देश दिया और उनसे कहा कि वो कल का कार्यक्रम स्थगित नहीं करना चाहते हैं. इसके बाद वो भी जाने के लिए सहमत हो गईं थीं.''

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