संयुक्त राष्ट्र का श्रीलंका में नागरिकों की हिफाजत का आह्वान
संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "श्रीलंका में पिछले सप्ताह सैकड़ों नागरिकों के मारे जाने की घटना से बेहद स्तब्ध हैं।"
श्रीलंका के पूर्वोत्तर हिस्से में सेना और विद्रोहियों के बीच भीषण संघर्ष में करीब 400 नागरिकों के मारे जाने के बाद यह बयान आया है।
सरकार और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम(लिट्टे) इन मौतों के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
बयान में कहा गया है, "महासचिव ने श्रीलंका सरकार से बिना और खून-खराबे के संघर्ष रुकवाने के सभी संभव उपायों का पता लगाने तथा उन शर्तो को सार्वजनिक करने को कहा है जिन्हें और ज्यादा लोगों की जान गंवाए बगैर हासिल किया जा सकता है। लिट्टे से भी उन शर्तो पर सकरात्मक रुख अपनाने को गया है।"
इससे पहले श्रीलंका सरकार ने कहा था कि वह भारी हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगी और लक्ष्य क्षेत्र में फंसे करीब 20,000 नागरिकों को सुरक्षित निकालना है।
बयान में कहा है कि महासचिव ने दोनों पक्षों से बार-बार अनुरोध किया है कि वे उन इलाकों में भारी हथियारों का इस्तेमाल नहीं करें जहां नागरिकों की संख्या ज्यादा है।
इस बीच अंतर्राष्ट्रीय रेडक्रास समिति के कर्मी अभी तक घायलों को वहां से हटाने के लिए नहीं पहुंच सके हैं।
रविवार को घायलों की संख्या 1200 से ज्यादा बताई गई थी।
सरकारी सेनाओं का कहना है कि वे अपने अभियान के निर्णायक दौर में पहुंच चुकी हैं।
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का कहना है कि मुल्लइतिवू के तटीय इलाके में फंसे नागरिकों की संख्या करीब 50,000 है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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