पाकिस्तानी मीडिया ने जातीय राजनीति पर चिंता का इजहार किया
एक अन्य अखबार ने अपने संपादकीय में लिखा है कि शहर के बहुसंख्यक मुहाजिरों और सिंधियों के बीच बढ़ी दूरी ने मुहाजिरों और अल्पसंख्यक पश्तूनों के बीच की दूरी को भी चौड़ा कर दिया है।
डान ने 'नाट ए मेच्योर एप्रोच' (अपरिपक्व दृष्टिकोण) शीर्षक वाले अपने संपादकीय में लिखा है, "ऐसे समय में जब समाज में एकता और भाईचारे की सबसे अधिक आवश्यकता है, उस समय जातीयता की राजनीति हमारे समाज को छिन्न-भिन्न कर रही है।"
संपादकीय में सिंध प्रांत के सत्ताधारी गठबंधन में शामिल तीनों पार्टियों से आह्वान किया गया है कि उन्हें स्वात और केंद्र शासित कबाइली इलाकों (एफएटीए) में तालिबान के खिलाफ युद्ध के लिए एक संयुक्त दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए।
संपादकीय में लिखा है, "कराची को विस्थापितों की समस्या से भी निपटना है और परिपक्व ता का तकाजा यह है कि इस समस्या के साथ संवेदनशील तरीके से पेश आना चाहिए।"
एक अन्य लेख में कहा गया है, "सरकार, कराची को राजनीतिक और आर्थिक रूप से नाजुक इस घड़ी में असहाय नहीं छोड़ सकती।"
पिछले महीने मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) और पश्तूनों के बीच हुए संघर्षो का जिक्र करते हुए लेख में लिखा गया है, "यदि अतीत का अनुसरण किया गया तो इससे कुछ गोलियां चलने और कुछ लाशें गिरने के अलावा और कुछ भी हासिल नहीं होने वाला और यह कराची के कमजोर हो चले सामाजिक ताने-बाने को पूरी तरह तार-तार कर देगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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