श्रीलंका में सेना सुरक्षित क्षेत्र में दाखिल हुई (लीड-1)

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कहेलिया रंबुकवेला ने संवाददाताओं को बताया कि सेना लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के प्रतिरोध के बीच मंगलवार को सुरक्षित क्षेत्र में दाखिल हो गई।

तीन वर्गकिलोमीटर यह सुरक्षित क्षेत्र विद्रोहियों के कब्जे वाले छह किलोमीटर के क्षेत्र का हिस्सा है। ताजा कार्रवाई में सेना ने 90 नागरिकों को सुरक्षित निकाला है।

सेना के प्रवक्ता उदय नानायक्कारा ने बताया कि सेना लिट्टे के विरोध के बीच सुरक्षित क्षेत्र में दो तरफ से आगे बढ़ रही है। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में एक स्थान पर 25 और दूसरे में 10 विद्रोही मारे गए।

उन्होंने बताया कि विद्रोहियों ने तीन आत्मघाती हमले भी किए। प्रवक्ता ने सेना को पहुंचे नुकसान के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की।

सेना ने यह ताजा कार्रवाई ऐसे समय की है जब पिछले सप्ताहांत क्षेत्र में 400 से ज्यादा नागरिकों के मारे जाने की खबर है।

इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों से संघर्ष क्षेत्रों में फंसे नागरिकों को और नुकसान नहीं पहुंचाने का अनुरोध किया है।

संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "श्रीलंका में पिछले सप्ताह सैकड़ों नागरिकों के मारे जाने की घटना से वह बेहद स्तब्ध है।"

सरकार और लिट्टे इन मौतों के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

बयान में कहा गया है, "महासचिव ने श्रीलंका सरकार से बिना खून-खराबे के संघर्ष रुकवाने के सभी संभव उपायों का पता लगाने तथा उन शर्तो को सार्वजनिक करने को कहा है जिन्हें और लोगों की जान गंवाए बगैर हासिल किया जा सकता है। लिट्टे से भी उन शर्तो पर सकरात्मक रुख अपनाने को गया है।"

इससे पहले श्रीलंका सरकार ने कहा था कि वह भारी हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगी और लक्ष्य क्षेत्र में फंसे करीब 20,000 नागरिकों को सुरक्षित निकालना है।

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का कहना है कि मुल्लइतिवू के तटीय इलाके में फंसे नागरिकों की संख्या करीब 50,000 है।

बयान में कहा है कि महासचिव ने दोनों पक्षों से बार-बार अनुरोध किया है कि वे उन इलाकों में भारी हथियारों का इस्तेमाल नहीं करें जहां नागरिकों की संख्या ज्यादा है।

इस बीच अंतर्राष्ट्रीय रेडक्रास समिति ने विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों में नागरिकों के लिए 30 टन अनाज भेजा है लेकिन भीषण लड़ाई जारी रहने के कारण दोपहर तक जहाज प्रभावित इलाके तक नहीं पहुंच सका था। इसी जहाज पर वहां से घायलों को लाया जाना है।

रविवार को घायलों की संख्या 1200 से ज्यादा बताई गई थी।

सरकारी सेनाओं का कहना है कि वे अपने अभियान के निर्णायक दौर में पहुंच चुकी हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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