पंजाब में अकाली दल-भाजपा गठबंधन दबाव में
इस चुनाव से राज्य में सत्तारूढ़ अकाली दल-भाजपा गठबंधन की सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल के प्रति मतदाताओं के दृष्टिकोण का पता चलेगा। इसके साथ ही पिछले लोकसभा चुनाव में हासिल जीत को कायम रखने की गठबंधन की ताकत की भी परीक्षा होगी।
पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य की 13 में से 11 सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) गठबंधन विजयी हुआ था, उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी।
यद्यपि कोई भी नहीं मान रहा कि गठबंधन इस बार 11 सीटें जीतने में सफल होगा लेकिन अकाली दल के नए अध्यक्ष और राज्य के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं।
रविवार को लुधियाना में राजग की सफल रैली से राज्य के नेताओं का मनोबल बढ़ा है लेकिन यह अस्पष्ट है कि इसका मतदाताओं पर क्या प्रभाव होगा।
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी,पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, आठ राज्यों के मुख्यमंत्री और राजग के शीर्ष नेता रैली में शामिल थे।
अगले दिन सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूरा दिन पंजाब में बिताया और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने अमृतसर में एक रैली को संबोधित किया।
जिन नौ संसदीय क्षेत्रों में बुधवार को मतदान होगा, उनमें अमृतसर,गुरदासपुर, लुधियाना और जालंधर शामिल हैं। इन नौ संसदीय क्षेत्रों से कुल 139 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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