भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद की जातिगत भेदभाव पर प्रतिबंध की मांग

लंदन, 12 मई (आईएएनएस)। भारतीय मूल के एक ब्रिटिश सांसद ने कहा है कि ब्रिटेन में सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए तैयार विधेयक में दक्षिण एशियाई समुदाय के बीच जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करने का प्रावधान भी शामिल किया जाना चाहिए।

लंदन में भारतीय मूल के लोगों की बहुलता वाले उपनगर साउथाल से सांसद वीरेंद्र शर्मा ने संसद में समानता विधेयक पर चर्चा के दौरान इस विधेयक को पारित करने का आग्रह किया।

इस विधेयक का उद्देश्य नौ समानता कानूनों को एकीकृत करके एक समानता कानून को अस्तित्व में लाना है। इस कानून में नस्ल,लिंग,विकलांगता,उम्र,धर्म और विश्वास के आधार पर किए जाने वाले भेदभाव से निपटने के प्रावधान होंगे।

शर्मा ने सरकार से इस सूची में जातिगत भेदभाव पर रोक को भी शमिल करने का आग्रह किया जो ब्रिटेन के दक्षिण एशियाई समुदाय में भारी पैमाने पर विद्यमान है।

शर्मा ने आईएएनएस को एक साक्षात्कार में बताया कि ब्रिटेन और विशेषकर उनके संसदीय क्षेत्र के भारतीय उपमहाद्वीप मूल के बहुत अधिक लोग ब्रिटेन में जातिगत भेदभाव को गैरकानूनी घोषित किया जाना देखना पसंद करेंगे।

शर्मा ने कहा कि विधेयक में जातिगत भेदभाव पर प्रतिबंध को शामिल किया जाना इसलिए आवश्यक है क्योंकि ब्रिटेन में व्यापार बढ़ा रही कई भारतीय कंपनियां अनजाने में जातिगत भेदभाव को बढ़ावा दे रही हैं।

शर्मा ने कहा कि भारतीय कंपनियों के वरिष्ठ प्रबंधक स्तर के अधिकारी जिन्हें नियुक्ति का अधिकार है,उम्मीदवारों से उनके जाति या उपनाम पूछते हैं।

ब्रिटेन स्थित दलित समूहों का अनुमान है कि कम से कम 50,000 दलित ब्रिटेन में निवास करते हैं लेकिन दूसरे अनुमानों के अनुसार यह संख्या 200,000 तक हो सकती है।

'वायस ऑफ दलित इंटरनेशनल' की निदेशक एयुजेना क्यूलस ने कहा कि विवाह,नौकरी,सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में जातिगत भेदभाव होता है लेकिन लोग, खासकर दूसरी पीढ़ी के प्रवासी, शर्मिदगी के कारण इस पर चर्चा करने से बचना चाहते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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