वामदलों के अलावा जरदारी का वार्ता प्रस्ताव किसी को स्वीकार्य नहीं
नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का आम चुनाव के बाद भारत के साथ वार्ता आरंभ करने का प्रस्ताव वाम दलों के अलावा किसी भी पार्टी को स्वीकार्य नहीं है।
मुंबई पर हुए 26/11 आतंकवादी हमले में शामिल लोगों पर पाकिस्तान के कार्रवाई नहीं करने तक भारत के पड़ोसी देश से समग्र वार्ता आरंभ करने की कोई संभावना नहीं है,चाहे भविष्य में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार आए या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) अगली सरकार बनाए।
पाकिस्तान के लिए सबसे अच्छा यही रहेगा कि तीसरा मोर्चा सत्ता में आए, जिसमें शामिल वामदल ही केवल वार्ता को फिर से आरंभ करने और मुंबई के हमलावरों को दंडित करने के लिए समानांतर वार्ता आरंभ करने के पक्ष में हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे ब्रजेश मिश्र ने आईएएनएस से कहा,"उन्होंने मुंबई हमले की साजिश रचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आतंकवादियों को मदद देने की नीति को नहीं छोड़ा है। कुछ भी नहीं बदला है।"
मिश्र ने कहा,"ऐसी स्थिति में किसी भी सरकार के पाकिस्तान के साथ वार्ता आरंभ करने की संभावना नहीं है।"
मिश्र ने कहा कि सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि मुंबई पर आतंकवादी हमले के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई से पहले पाकिस्तान के साथ वार्ता शुरू नहीं की जाएगी।
पाकिस्तान में पूर्व राजदूत रहे जी.पार्थसारथी भी इससे सहमत हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ इस स्थिति में वार्ता करने का कोई मतलब नहीं है। मुंबई हमले के पीछे के लोगों पर कार्रवाई का कोई संकेत नहीं है। गिरफ्तार लोगों में से कुछ को रिहा भी कर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि जरदारी के वार्ता प्रस्ताव के एक दिन बाद ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को स्पष्ट कर दिया कि संप्रग सरकार का रुख स्पष्ट है कि पाकिस्तान के साथ वार्ता पर दोबारा विचार मुंबई के हमलावरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के बाद ही होगा।
पाकिस्तान के प्रति मनमोहन सिंह सरकार के नरम रवैए की आलोचना से कभी न चूकने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने आईएएनएस से कहा,"पाकिस्तान को पहले मुंबई हमले के दोषियों को दंडित करने की मंशा दिखाने के साथ आतंकवादी ढांचा खत्म करना होगा, तभी वार्ता आरंभ हो सकती है।"
परंतु वामदलों का रुख इसके विपरीत है, जिनका मानना है कि पाकिस्तान के साथ गंभीर प्रश्नों को सुलझाने के लिए वार्ता बंद करना कोई हल नहीं है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी.राजा ने आईएएनएस से कहा,"हम पाकिस्तान के साथ एक सार्थक वार्ता के लिए हमेशा तैयार हैं। बातचीत का कोई विकल्प नहीं है। वार्ता की प्रक्रिया शुरू करने के साथ ही मुंबई हमले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव भी बढ़ाया जा सकता है। "
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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