यमुना बैंक मेट्रो चालू, पर्यावरणवादी नाराज
दिल्ली मेट्रो के चरण दो के तहत आने वाले इंद्रप्रस्थ से यमुना बैंक विस्तार को आम यात्रियों के लिए सुबह छह बजे खोल दिया गया। यह स्टेशन इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि आनंद विहार से अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) कारिडोर और नोएडा के लिए यहीं से लाइनें बदलती हैं।
पर्यावरणवादियों ने नदी के किनारे किए गए निर्माण के कारण पर्यावरण की अपूरणीय क्षति को लेकर बार-बार चिंता व्यक्त की है।
37 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यमुना बैंक स्टेशन और इसका विस्तार यमुना नदी के बिल्कुल करीब है।
पर्यावरणवादी विमलेंदु झा ने दावा किया है कि इस स्टेशन का निर्माण दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिसंबर 2005 में दिए गए उस आदेश का उल्लंघन करता है, जिसमें अदालत ने नदी के 300 मीटर के दायरे में सभी तरह के निर्माण कार्यो पर रोक लगा दी थी।
झा ने आईएएनएस को बताया, "अदालत द्वारा नियुक्त उषा मेहरा आयोग के अनुसार नदी के 300 मीटर के दायरे में कोई भी निर्माण अनधिकृत है। इस इलाके में निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश है। ऐसे में यहां स्टेशन और रेल पटरियों का निर्माण अदालत के स्थगन आदेश का उल्लंघन है।"
दूसरी ओर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक ई.श्रीधरन ने संवाददाताओं से कहा है, "मैं इस बात को नहीं समझ पाता कि इस स्टेशन से पर्यावरण को क्षति कैसे पहुंच रही है। मेट्रो की सभी पटरियों की डिजाइन जलसंरक्षण को ध्यान में रख कर बनाई गई है। यहां प्रदूषण करने वाला कोई पदार्थ बाहर नहीं निकाला जा रहा है, लिहाजा यहां पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होने वाला है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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