भारत का अफ्रीका से जेनेरिक दवाओं के आयात पर रोक न लगाने का आग्रह
आदिस अबाबा, 10 मई (आईएएनएस)। भारत ने अफ्रीकी देशों से आग्रह किया है कि वे जेनेरिक दवाओं के आयात पर प्रतिबंध न लगाएं, क्योंकि मौजूदा वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण मरीजों की दवाएं खरीदने की क्षमता काफी प्रभावित हुई है।
अफ्रीकी देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों के चार दिवसीय सम्मेलन के दौरान भारतीय उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजीव खेर ने आईएएनएस से कहा कि अपने ही लोगों की खातिर अफ्रीका को जेनेरिक दवा उत्पादों पर प्रतिबंध को मंजूरी नहीं देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल यहां अफ्रीकी स्वास्थ्य मंत्रियों को यह समझाने आया है कि जेनेरिक दवाएं वास्तविक दवाओं के समान प्रभावी हैं और जेनेरिक दवा विरोधी कानून पारित करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
जेनेरिक दवाओं के उत्पादन और खपत में भारतीय दवा उद्योग दुनिया का सबसे बड़ा उद्योग है।
अधिकारी ने बताया कि केन्या पहले ही जेनेरिक दवा विरोधी कानून पारित कर चुका है और वहां के लोग 10 गुना अधिक महंगी परंतु अधिक प्रभावी नहीं, दवाएं खरीद रहे हैं।
दवाओं की कीमतों में अंतर के बारे में जानकारी देते हुए खेर ने कहा कि पश्चिमी देशों की कैंसर रोधी दवा की कीमत 140,000 रुपये है जबकि जेनेरिक दवा की कीमत केवल 5,000 रुपये है।
खेर ने कहा कि बड़ी बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियां युगांडा और जांबिया जैसे देशों पर जेनेरिक दवा विरोधी कानून लागू करने के लिए भारी दबाव डाल रही हैं।
इस मुद्दे से अफ्रीकी देशों में एचआईवी/एड्स कार्यक्रम के प्रभावित होने की आशंका है। अफ्रीकी महाद्वीप में कुल 2.5 करोड़ एचआईवी संक्रमित लोग हैं। इनमें से 30 लाख लोग भारत में बनी एंटी-रिट्रोवायरल दवाओं का उपयोग करते हैं। महाद्वीप में केवल दक्षिण अफ्रीका ही एचआईवी/एड्स रोधी दवा का निर्माण करता है।
अफ्रीकी स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक स्वाइन फ्लू से निपटने की तैयारी, सदी के विकास लक्ष्यों, अफ्रीका के स्वास्थ्य क्षेत्र को वित्त की उपलब्धता तथा शिशु और मातृ मृत्यु-दर को कम करने जैसे मुद्दों पर हो रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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