माओवादियों ने बुद्ध जयंती और नई सरकार के गठन, दोनों से दूरी बनाई
काठमांडू, 9 मई (आईएएनएस)। नेपाल की माओवादी पार्टी शनिवार को दो महत्वपूर्ण मौकों से अपने को दूर बनाए रखा। एक तो वह नेपाली गणराज्य के सर्वमान्य भगवान बुद्ध के जयंती समारोहों में शामिल नहीं हुई, दूसरे उसने एक नई सर्वदलीय सरकार के गठन से भी दूरी बनाए रखी।
नेपाल में ताजा संकट सोमवार को उस समय पैदा हुआ, जब माओवादियों के प्रमुख नेता पुष्प कमल दहाल प्रचंड ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण बुद्ध जयंती समारोह का पूरा रंग ही फीका पड़ गया।
भगवान बुद्ध, राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में दक्षिणी नेपाल के लुंबिनी में एक राज परिवार में पैदा हुए थे। प्रति वर्ष इस दिन नेपाल व नेपाल के बाहर से तमाम लोग बुद्ध के जन्म स्थान पर आयोजित होने वाले जयंती समारोह में हिस्सा लेने के लिए पहुंचते रहे हैं।
प्रचंड, राष्ट्रपति रामबरन यादव के साथ इस वर्ष लुंबिनी में आयोजित समारोह में हिस्सा लेने वाले थे। लेकिन राष्ट्रपति द्वारा सेना प्रमुख जनरल रूक्मांगद कटवाल को बहाल किए जाने के बाद से दोनों एक-दूसरे के धुर विरोधी हो गए हैं।
कार्यवाहक प्रधानमंत्री प्रचंड अपनी पार्टी की नई रणनीति बनाने में व्यस्त हैं, लिहाजा वे राजधानी में बने हुए हैं। उन्होंने राजधानी में आयोजित 'पीपुल्स वार' के दौरान लापता हुए लोगों के 1,000 से भी अधिक परिवारों के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया।
हालांकि राष्ट्रपति ने शनिवार तक एक सर्वदलीय सरकार बनाने के लिए 25 संसदीय पार्टियों को कहा है, लेकिन उनमें इस मुद्दे पर किसी सहमति पर पहुंचने का कोई संकेत नहीं है। दूसरी ओर माओवादियों ने राष्ट्रपति को हटाए जाने के लिए दबाव बना दिया है।
ऐसे में राष्ट्रपति के पास नए प्रधानमंत्री के लिए अंतरिम संसद में चुनाव कराने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता, जैसा कि उन्होंने पिछले वर्ष किया था। लेकिन माओवादियों ने संसद सत्र बुलाए जाने पर सहमति देने से इंकार कर दिया है, लिहाजा निकट भविष्य में प्रधानमंत्री के लिए चुनाव का आयोजन भी असंभव दिखता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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