रैगिंग पर अदालत का आदेश हर हाल में लागू किया जाना चाहिए : राजेंद्र कचरू
कचरू ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा, "इस मामले में निगरानी सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि निगरानी के बिना इस आदेश को लागू किए जाने का कोई मतलब नहीं है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो आप रैगिंग को कैसे पकड़ पाएंगे। हमें मुखबिरों की जरूरत है और उसके लिए एक प्रावधान बनाए जाने की भी जरूरत है।"
सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्यों को दो समितियों के गठन का आदेश दिया था। एक समिति शैक्षणिक संस्थानों में शराबखोरी से निपटेगी और दूसरी रैगिंग करने वालों और रैगिंग के पीड़ितों का मनोवैज्ञानिक इलाज करेगी।
सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश एक जांच आयोग की सिफारिशों के आधार पर दिए हैं। इस आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर पूर्व में रैगिंग की घटनाओं की जांच की थी। आयोग ने खासतौर से हिमाचल प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज में आठ मार्च को रैगिंग के शिकार हुए छात्र अमन कचरू के मामले की जांच की थी।
राजेंद्र कचरू ने कहा है, "अदालत का आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया है। मुझे उसके बारे में विस्तृत कुछ भी जानकारी नहीं है। उसमें आदेश को लागू करने और उसकी निगरानी के बारे में कुछ है या नहीं, इसके लिए हमें उस आदेश को देखने की जरूरत है। यदि उसमें यह सब नहीं है तो वह आदेश किसी काम का नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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