वरुण पर एनएसए लगाने का फ़ैसला अवैध

उत्तर प्रदेश के सलाहकार बोर्ड ने वरुण गाँधी के मामले में बुधवार को यह फ़ैसला सुनाया है.
इस बोर्ड के सदस्यों में उच्च न्यायालय के एक जज और दो सेवानिवृत जज होते हैं. ये इस बारे में सलाह देता है कि कहीं राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा और इसे आदेश के बाद भी सरकार के लिए आगे अपील का रास्ता खुला हुआ है.
वरुण के ख़िलाफ़ मुसलमानों के ख़िलाफ़ कथित भड़काऊ भाषण देने का आरोप है.
वरुण गाँधी ने मार्च के पहले हफ़्ते में पीलीभीत की स्थानीय अदालत के समक्ष समर्पण किया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.
इसके बाद वरुण गाँधी को सुप्रीम कोर्ट ने 16 अप्रैल को इस शर्त पर रिहा किया था कि वे कोई भड़काऊ भाषण नहीं देंगे. इसके बाद उनकी रिहाई की अवधी बढ़ा दी गई थी.
मायावती सरकार को झटका
हम पहले से कह रहे थे कि वरुण के ख़िलाफ़ एनएसए लगाना अनुचित है. अब उच्च न्यायालय के जजों के स्तर से ये फ़ैसला आया है. वरुण का बेदाग़ होने का दावा सही साबित हुआ है वरुण के वकील
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इस आदेश के बाद वरुण के वकील मुकुल रोहतगी ने मीडिया को बताया, "हम पहले से कह रहे थे कि वरुण के ख़िलाफ़ एनएसए लगाना अनुचित है. अब उच्च न्यायालय के जजों के स्तर से ये फ़ैसला आया है. वरुण का बेदाग़ होने का दावा सही साबित हुआ है."
इस आदेश को मायावती सरकार के लिए एक झटका माना जा रहा है.
पर्यवेक्षकों के मुताबिक मायावती सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख़ अपना कर एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की थी लेकिन अब उसे सलाहकार बोर्ड के फ़ैसले पर अपना रुख़ स्पष्ट करना होगा.
महत्वपूर्ण है कि जहाँ कांग्रेस कह रही है कि ये कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, वहीं भाजपा ने शुरु से ही एनएसए लगाए जाने को ग़लत ठहराया था और कहा था कि वह इसका विरोध करेगी.


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