प्रचंड का भारत से सुलह का प्रयास

प्रचंड के मीडिया सलाहकार ओम शर्मा ने बताया कि सूद के साथ बैठक में प्रचंड ने कहा कि यद्यपि नेपाल की जनता सेना प्रमुख प्रकरण में भारत की कथित भूमिका से नाखुश है फिर भी सरकार में नई दिल्ली के खिलाफ कोई पूर्वाग्रह नहीं है। नेपाल अपने दोनों पड़ोसियों चीन और भारत के साथ एक समान मधुर संबंध रखना चाहता है।
संयुक्त राष्ट्र से सत्यापन के दौरान माओवादी पार्टी की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर बताने संबंधी वीडियो टेप जारी होने से भी प्रचंड की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। उल्लेखनीय है कि माओवादी पार्टी प्रमुख ने वीडियो टेप में कहा था कि यदि प्रतिक्रियावादी भारत और अमेरिका को आशंका होती कि माओवादी पार्टी चुनाव में विजयी होगी तो वे कभी भी चुनाव नहीं होने देते।
सेन प्रमुख को बर्खास्त करने में विफल रहने पर इस्तीफा देने के बाद प्रचंड की भारतीय राजदूत से यह पहली मुलाकात है। नेपाल में संयुक्त राष्ट्र मिशन के प्रमुख केरिन लेंडग्रीन ने भी शुक्रवार को प्रचंड से मुलाकात की और उन्हें संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून की इस चिंता से अवगत कराया कि पार्टियों के बीच नए विवाद से शांति प्रक्रिया भटक सकती है।
शर्मा ने कहा कि प्रचंड ने लेंडग्रीन को आश्वस्त किया कि उनकी पार्टी शांति प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है और संविधान का निर्माण तय समय में पूरा होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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