'चुनाव लड़ना नए उत्पाद बेचने के समान'

वेंकटाचारी जगन्नाथन

चेन्नई, 8 मई (आईएएनएस)। मुंबई पर आतंकवादी हमला भले ही मुंबईवासियों को घरों से बाहर निकलकर बड़ी संख्या में वोट डालने के लिए प्रेरित कर पाया लेकिन चेन्नई में की एक झुग्गी में पले और भारतीय प्रबंधन संस्थान तक पहुंचे ई.शरथ बाबू को इससे तमिलनाडु के चुनाव समर में कूदने की प्रेरणा मिली।

फूडकिंग कैटेरिंग सर्विस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी 29 वर्षीय बाबू ने आईएएनएस से कहा कि राजनीति में आना उनकी योजना में था लेकिन मुंबई पर आतंकवादी हमला इसके लिए निर्णायक क्षण रहा। इतने वर्षो से राजनीतिक दल उच्च शिक्षित लोगों को राजनीति से बाहर रखने में सफल रहे हैं।

बाबू की कंपनी की वार्षिक आय सात करोड़ रुपये है। बाबे सड़क के किनारे इडली बेचने वाले और झुग्गी में रहने वाले पिता की संतान हैं और उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर बीआईटीएस, पिलानी और फिर आईआईएम अहमदाबाद से शिक्षा हासिल की। कई ऊंचे वेतन वाली नौकरियों को ठुकराकर उन्होंने वर्ष 2006 में अपना व्यवसाय आरंभ किया।

दक्षिण चेन्नई संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार बाबू का मुकाबला डीएमके के आर.एस.भारती,एआईएडीएमके के एस.राजेंद्रन और भारतीय जनता पार्टी के एल.गणेशन से है।

बाबू का कहना है कि चुनाव लड़ना किसी उत्पाद की बिक्री या सेवा के समान है। दोनों में विस्तृत श्रोताओं तक अपनी बात संप्रेषित करनी पड़ती है।

बाबू के सपने और उपलब्धियों से प्रभावित करीब 1,200 स्वयंसेवक चुनाव में उनकी सफलता के लिए काम कर रहे हैं। इनमें छात्र और पेशेवर भी शामिल हैं।

बाबू गरीब परिवारों से स्वयं मुलाकात कर रहे हैं जबकि युवाओं और शिक्षित मध्यम वर्ग को लक्ष्य करके ऑनलाइन प्रचार भी किया जा रहा है। उनका कहना है कि उनका प्रचार का बजट 12 लाख रुपये है जो चंदे के माध्यम से जुटाया गया है। निर्वाचन आयोग ने प्रचार के लिए खर्च की सीमा ढाई लाख रुपये रखी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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